नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
पटना: बिहार में पिछले कई हफ्तों से चर्चा का केंद्र बनीं आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन ने आखिरकार अपनी सरकारी नौकरी जॉइन कर ली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हुए 'हिजाब विवाद' का वीडियो वायरल होने के 23 दिन बाद, उन्होंने 7 जनवरी 2026 को निर्धारित अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) के भीतर अपनी ड्यूटी संभाल ली। उनकी जॉइनिंग के साथ ही उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें यह कहा जा रहा था कि वे इस घटना से आहत होकर नौकरी छोड़ सकती हैं या दूसरे राज्य का रुख कर सकती हैं।
यह विवाद 15 दिसंबर 2025 को तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री सचिवालय में नवनियुक्त आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटने का कार्यक्रम आयोजित था। डॉ. नुसरत परवीन जब अपना नियुक्ति पत्र लेने मंच पर पहुंचीं, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके नकाब/हिजाब को लेकर टिप्पणी की और उसे अपने हाथों से हटाने का प्रयास किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। विपक्ष ने इसे महिला की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता का अपमान बताते हुए सरकार पर तीखे हमले किए। घटना के बाद डॉ. नुसरत सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आईं और न ही उन्होंने शुरुआती जॉइनिंग डेट पर रिपोर्ट किया।
डॉ. नुसरत को सबसे पहले 20 दिसंबर तक पटना सदर अस्पताल में योगदान देना था, लेकिन वे नहीं आईं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनकी जॉइनिंग की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर किया और फिर अंतिम रूप से 7 जनवरी 2026 निर्धारित किया। बताया जा रहा है कि इस बीच वे काफी तनाव में थीं और अपने परिवार के साथ कुछ समय के लिए शहर से बाहर भी चली गई थीं। उनके कॉलेज के प्राचार्य और विभाग के अधिकारियों ने उनसे लगातार संपर्क साधने और काम पर लौटने की अपील की थी।
विवाद के बीच झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने डॉ. नुसरत को 3 लाख रुपये मासिक वेतन, सरकारी फ्लैट और मनपसंद पोस्टिंग का ऑफर देकर मामले को और हवा दे दी थी। हालांकि, नुसरत ने बिहार में ही अपनी सेवाएं जारी रखने का फैसला किया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 6 जनवरी को उनका मेडिकल चेकअप पूरा हुआ और 7 जनवरी को उन्होंने पटना सिविल सर्जन कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी पोस्टिंग पटना सदर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में की गई है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों ने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से परहेज किया, जिससे मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है। डॉ. नुसरत की जॉइनिंग न केवल उनके करियर के लिए एक नई शुरुआत है, बल्कि इसने बिहार की राजनीति में कई दिनों से उबल रहे एक बड़े विवाद को भी शांत करने का काम किया है।







