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₹5,500 में तेजस राजधानी: लग्ज़री सफर, प्राइवेट केबिन और फ्री फूड

नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी |

₹5,500 में मुंबई-दिल्ली तेजस राजधानी का लग्ज़री सफर: प्राइवेट केबिन, शावर और अनलिमिटेड फूड....

मुंबई: सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने ट्रैवल प्रेमियों के बीच चर्चा छेड़ दी है। मुंबई से दिल्ली तक तेजस राजधानी एक्सप्रेस की फर्स्ट क्लास यात्रा का अनुभव शेयर करने वाले यात्री अक्षय मल्होत्रा ने बताया कि कैसे उन्होंने ₹5,500 के किराए में होटल जैसी सुविधाओं का आनंद लिया। इस सफर में प्राइवेट केबिन, फ्रेश बेडशीट्स, पिलो, मिरर, न्यूज़पेपर और अनलिमिटेड फूड-ड्रिंक्स शामिल थे।

वायरल वीडियो ने मचाई सनसनी

अक्षय ने इंस्टाग्राम पर पूरा ट्रैवल व्लॉग शेयर किया। इसमें दिखाया गया कि सफर के शुरुआती पलों से लेकर दिल्ली पहुंचने तक ट्रेन ने यात्रियों को किस तरह लग्ज़री टच दिया। वीडियो वायरल होने के बाद नेटिज़न्स ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने इसे "अफोर्डेबल लग्ज़री" करार दिया, तो कई ने मजाक करते हुए कहा – “भाई, फ्लाइट ले लेता।”

ऑनबोर्ड सर्विसेज: वेलकम ड्रिंक से लेकर आइसक्रीम तक

वीडियो में दिखा कि यात्रियों को मैंगो जूस वेलकम ड्रिंक के तौर पर दिया गया। इसके बाद चाय, कचौड़ी और स्नैक्स सर्व हुए। डिनर में हॉट सूप, चिली पनीर, पनीर-दाल-सब्ज़ी, रोटी, चावल, सलाद और आइसक्रीम जैसी वैरायटी थी। वहीं, सुबह के नाश्ते में पोहा, उपमा, कटलेट्स और केला परोसा गया। हर सर्विंग अनलिमिटेड थी, जिससे यात्री होटल जैसी फीलिंग पा रहे थे।

प्राइवेट केबिन और शावर की सुविधा

फर्स्ट क्लास का सबसे बड़ा आकर्षण था प्राइवेट केबिन। इसमें बेडशीट, पिलो, मिरर और न्यूज़पेपर जैसी डिटेल्ड चीजें शामिल थीं। खास बात यह कि ट्रेन में ऑनबोर्ड शावर फैसिलिटी भी मौजूद थी, जिसमें गीजर, हैंड शावर, टॉवल और टॉयलेट्रीज़ दी गईं। लंबे सफर में यह सुविधा यात्रियों को एक नया अनुभव दे रही थी, जो आम तौर पर भारतीय रेल में नहीं मिलता।

समय पर पहुंची राजधानी

ट्रेन शाम 5 बजे मुंबई सेंट्रल से रवाना हुई और सुबह 8:30 बजे बिना देरी के दिल्ली पहुंच गई। कुल 1386 किलोमीटर की दूरी ट्रेन ने औसतन 90 किमी/घंटा की स्पीड से तय की, जबकि अधिकतम स्पीड 140 किमी/घंटा तक रही।

तेजस राजधानी: लग्ज़री कोचेज़ और हाई प्रायोरिटी

तेजस राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12951) में LHB तेजस कोचेज़ लगाए गए हैं। इसमें 1 फर्स्ट एसी, 5 सेकंड एसी, 12 थर्ड एसी, पैंट्री कार और पावर कार शामिल हैं। फर्स्ट क्लास की प्राइवेसी फ्लाइट्स से कहीं ज्यादा है, क्योंकि यात्री यहां प्राइवेट केबिन में सफर कर सकते हैं।

यात्रियों की प्रतिक्रियाएँ: फ्लाइट vs ट्रेन बहस

सोशल मीडिया पर इस वीडियो ने फ्लाइट बनाम ट्रेन डिबेट को हवा दे दी। कई यूजर्स ने कहा कि ₹5,500 में फ्लाइट टिकट भी मिल जाता है, जिसमें समय कम लगता है। वहीं, समर्थकों का तर्क था कि ट्रेन में आराम से नींद पूरी की जा सकती है, शावर और अनलिमिटेड फूड जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जो फ्लाइट्स में संभव नहीं।

एक यूजर ने लिखा: “फ्लाइट में टाइम बच जाएगा, लेकिन ट्रेन में सफर का मज़ा और कम्फर्ट अलग ही है।” कुछ ने इसे रेलवे की अपग्रेड क्वालिटी का उदाहरण बताया।

बुकिंग और पेट्स को लेकर सवाल

वीडियो के वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में यात्रियों ने प्रैक्टिकल सवाल भी पूछे। किसी ने दिसंबर महीने की बुकिंग डिटेल्स जाननी चाही, तो कुछ ने पूछा कि क्या प्राइवेट केबिन में पेट्स को अलाउ किया जाता है? इससे साफ है कि इस लग्ज़री सर्विस को लेकर आम लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है।

राजधानी एक्सप्रेस का इतिहास

भारत की राजधानी एक्सप्रेस का इतिहास भी खास है। इसे 1969 में शुरू किया गया था। यह देश की पहली सुपरफास्ट ट्रेन थी, जो दिल्ली को बड़े शहरों से जोड़ती थी। मुंबई तेजस राजधानी को 2021 में अपग्रेड कर मॉडर्न तेजस कोचेज़ दिए गए। इसे “किंग ऑफ ट्रेन्स” भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भारतीय रेलवे में सबसे ऊंची प्राथमिकता मिलती है।

इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स की झलक

अक्षय का अनुभव इस बात का संकेत है कि भारतीय रेलवे अब इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स की ओर बढ़ रहा है। छोटे-छोटे डिटेल्स, जैसे मिरर और न्यूज़पेपर, यात्री अनुभव को और बेहतर बनाते हैं।

इंटरनेट पर जारी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद से सोशल मीडिया पर ट्रैवलर्स लगातार अपने विचार रख रहे हैं। कुछ ने इसे मिडिल क्लास परिवारों के लिए होटल जैसी लग्ज़री का विकल्प कहा, जबकि कई ने दोहराया कि “कम्फर्ट बनाम स्पीड” की जंग हमेशा फ्लाइट और ट्रेन के बीच रहेगी।