नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
जारी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में साल-दर-साल 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। इस वृद्धि में सेवा क्षेत्र और विनिर्माण की दर नौ प्रतिशत से ऊपर रही। इस अवधि में निजी खपत में तेजी रही, जबकि सरकारी खपत में पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में मामूली गिरावट दर्ज की गयी।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 48.63 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 44.94 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 8.2 प्रतिशत अधिक है। यह जनवरी - मार्च 2024 तिमाही के बाद सबसे तीव्र वृद्धि है।
इससे पहले वर्तमान वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल–जून 2025) में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 5.6 प्रतिशत रही थी।
समीक्षाधीन तिमाही में सेवा क्षेत्र 9.2 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र 9.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा। वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं में 10.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर) में जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 8 प्रतिशत पर पहुँच गई। पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह आंकड़ा 6.1 प्रतिशत और दूसरी छमाही में 6.9 प्रतिशत था।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहली तिमाही के 7.8 प्रतिशत और दूसरी तिमाही के 8.2 प्रतिशत की विकास दर अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को दर्शाती है तथा मांग की स्थिति सुदृढ़ बनी हुई है।
जीडीपी में तेज़ उछाल का मुख्य आधार द्वितीयक क्षेत्र का प्रदर्शन रहा, जिसमें विनिर्माण शामिल है। इस क्षेत्र में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पहली तिमाही में यह 7.0 प्रतिशत थी। विनिर्माण की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत से बढ़कर 9.1 प्रतिशत, बिजली–गैस–जल आपूर्ति एवं अन्य यूटिलिटी सेवाओं की 0.5 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत, और निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत से घटकर 7.2 प्रतिशत पर आ गई।
प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर पहली तिमाही के 2.8 प्रतिशत से बढ़कर दूसरी तिमाही में 3.1 प्रतिशत हो गई। इस क्षेत्र में कृषि, पशुपालन, वानिकी एवं मत्स्यपालन में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि पहली तिमाही में यह 3.7 प्रतिशत थी।
दूसरी तिमाही में सेवा क्षेत्र में वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा, और यह 10.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा। पहली तिमाही में यह वृद्धि 9.5 प्रतिशत थी। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण सेवाओं की वृद्धि दर 8.6 से घटकर 7.4 प्रतिशत पर आ गई। लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं की वृद्धि दर 9.8 से गिरकर 9.7 प्रतिशत हो गई। कुल मिलाकर सेवा क्षेत्र की वृद्धि 9.3 प्रतिशत से घटकर 9.2 प्रतिशत रही।
व्यय आधारित मदों में आयात में सबसे अधिक 12.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। निजी अंतिम उपभोग व्यय 7.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सरकारी अंतिम उपभोग व्यय 2.7 प्रतिशत घटा। सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और निर्यात 5.6 प्रतिशत बढ़ा।
पहली छमाही में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 9.3 प्रतिशत और विनिर्माण की 8.4 प्रतिशत रही। कृषि क्षेत्र में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि खनन क्षेत्र में 1.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।







