नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l
लोकसभा में मंगलवार को मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी दलों द्वारा किए गए हंगामे के चलते सदन का कामकाज लगातार दूसरे दिन भी बाधित रहा। सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
दिन की शुरुआत में ही दो बार स्थगन के बाद जब कार्यवाही पुनः प्रारंभ हुई, विपक्षी सदस्य आसन के समीप पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। इस बीच पीठासीन अधिकारी दिलीप सेऊकिया ने विपक्ष को समझाते हुए कहा कि सदन चर्चा के लिए तैयार है और जिस मुद्दे पर वे बात करना चाहते हैं, उस पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर बैठकर सदन को चलाने में सहयोग करने की अपील की। सेऊकिया ने कहा कि देश की जनता सदन की कार्यवाही देख रही है और इस तरह का व्यवधान जनता को पसंद नहीं आता।
सेऊकिया ने यह भी कहा कि बिहार में एसआईआर हुआ और जनता ने इसे समर्थन दिया, ऐसे में इस मुद्दे पर बिना कारण हंगामा करना उचित नहीं है। पीठासीन अधिकारी के बार-बार आग्रह के बावजूद विपक्षी सदस्य नारेबाजी से नहीं रुके, जिसके बाद सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
दोपहर बाद पुनः कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने हंगामा तेज कर दिया। कई सदस्य सदन के बीचोबीच आकर शोर-शराबा करते रहे, जिसके कारण जरूरी कागजात सदन के पटल पर रखे जाने तक में कठिनाई हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार चुनाव सुधारों सहित सभी मुद्दों पर नियमों के अनुसार चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने बताया कि विपक्ष के नेताओं से संपर्क किया गया है और उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है ताकि कोई समाधान निकाला जा सके।
रिजिजू ने विपक्ष से कहा कि ठंडे दिमाग से चर्चा में शामिल हों क्योंकि देश में कई मुद्दे हैं और उन पर विमर्श आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक मुद्दे के कारण बाकी मुद्दों को नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने विपक्षी दलों को आगाह किया कि लगातार इस तरह का व्यवहार जनता का विश्वास कम कर सकता है।
हालांकि रिजिजू और बाद में पीठासीन अधिकारी पी.सी. मोहन के अनुरोध के बावजूद विपक्ष अपने स्थान पर वापस नहीं गया और हंगामा जारी रखा। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य नारेबाजी करते रहे। अंततः शोरगुल के बीच सदन की कार्यवाही फिर से स्थगित करनी पड़ी।







