नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
महाराष्ट्र। समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वे 30 जनवरी 2026 से महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन पर बैठेंगे।
यह अनशन उनकी अंतिम सांस तक जारी रहेगा। अन्ना ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को गुरुवार, 11 दिसंबर को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि सरकार तुरंत कानून लागू नहीं करती तो वे प्राण त्याग देंगे, लेकिन अपने निर्णय से पीछे नहीं हटेंगे। अन्ना की इस घोषणा से महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गौरतलब है कि, 2011 में उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन किया था, जिसका असर केंद्र और दिल्ली की कांग्रेस सरकार पर ऐसा पड़ा कि सत्ता से बाहर हो गए।
अन्ना हजारे आंदोलन पर क्यों उतर रहे हैं?
मुख्य कारण महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लागू करने में लगातार हो रही देरी है। कानून को मंजूरी मिले दो साल से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन यह अब तक लागू नहीं किया गया। इसी देरी से नाराज होकर अन्ना हजारे ने दोबारा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है।
रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन की तैयारी:
अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि लोकायुक्त कानून तुरंत लागू नहीं हुआ, तो वे 30 जनवरी 2026 से अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन करेंगे। पत्र में उन्होंने लिखा है कि हार्ट अटैक से मरने की बजाय देश और समाज के हित में प्राण त्यागना मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। वे कई वर्षों से महाराष्ट्र में एक मजबूत लोकायुक्त कानून की मांग कर रहे हैं।
2024 में मिली मंजूरी, फिर भी लागू नहीं;
अन्ना हजारे के अनुसार, लोकायुक्त विधेयक 2022 में विधानसभा और 2023 में विधान परिषद से पारित हो चुका है। 2024 में राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई, लेकिन इसके बावजूद कानून अब तक लागू नहीं हुआ। हजारे का कहना है कि राज्य सरकार ने यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र को भेज दिया था, पर एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अन्ना हजारे ने लिखा कि यह उनका निजी मुद्दा नहीं है, बल्कि जनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का सवाल है। उनका कहना है कि सरकार में इस कानून को लागू करने की इच्छाशक्ति दिखाई नहीं दे रही, इसलिए उनके पास आमरण अनशन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।







