विदेश डेस्क, ऋषि राज |
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान को लेकर पिछले कई हफ्तों से चल रही मौत और स्वास्थ्य संबंधी अफवाहों पर आखिरकार विराम लग गया है। मंगलवार को उनकी बहन डॉ. उजमा खान ने अदियाला जेल में उनसे मुलाकात की और बाहर आकर बताया कि इमरान “पूरी तरह जिंदा, फिट और हेल्दी” हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री को सोलिटरी कंफाइनमेंट में रखा गया है और उन पर “मेंटल टॉर्चर” किया जा रहा है।
उजमा खान ने मीडिया से कहा, “इमरान बिलकुल ठीक हैं, उनमें कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है। लेकिन उन्हें अकेले सेल में रखा गया है, किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा और मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान ने बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि इसके पीछे आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर का हाथ है।
गौरतलब है कि लगभग एक महीने से परिवारजन इमरान खान से नहीं मिल पाए थे। इस वजह से सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें फैल गईं—लोग यहाँ तक सवाल पूछने लगे थे कि “क्या इमरान अब भी जिंदा हैं?” PTI समर्थकों ने मंगलवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट और अदियाला जेल के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद सरकार ने दबाव में आकर उजमा और उनकी बहनों को मुलाकात की इजाजत दी।
उजमा के साथ उनकी बहनें नूरीन नियाज़ी और अलीमा खान भी थीं। वे गोरखपुर चेकपॉइंट से आगे बढ़ीं, जहां PTI के वकील सलमान अकरम राजा और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे।
जेल के बाहर कड़ी सुरक्षा, सेक्शन 144 लागू
मुलाकात के पुर्व रावलपिंडी और इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया। सेक्शन 144 लागू किया गया। आठ थानों के SHO और सीनियर अफसरों को जेल के बाहर तैनात किया गया। अदियाला रोड को लगभग 8 किलोमीटर तक सील कर दिया गया। स्कूल और कॉलेजों को बंद रखने का आदेश दिया गया। लोगों को केवल आईडी चेक करने के बाद ही आगे जाने की अनुमति मिली।
अदियाला जेल प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि इमरान खान “पूरी तरह ठीक” हैं और उनकी सेहत को लेकर किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। हालांकि उजमा ने कहा कि मानसिक दबाव और तन्हाई में रखे जाने की वजह से इमरान असंतुष्ट और नाराज़ हैं।
राजनीतिक तनाव फिर गहराया
उजमा की इस मुलाकात और बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। PTI ने इसे “राजनीतिक प्रताड़ना” बताया है, जबकि सरकारी सूत्रों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इमरान खान के समर्थकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनके मामलों में पारदर्शिता नहीं दिखाई गई, तो विरोध आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।







