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ऊंचाई पर उड़ते मच्छर रोगाणु फैला रहे

हेल्थ डेस्क, मुस्कान कुमारी 

बमाको (माली)। अफ्रीका में वैज्ञानिकों ने हेलियम गुब्बारों से लटके जालों की मदद से 120 से 290 मीटर ऊंचाई पर उड़ते मच्छर पकड़े, जिनमें मलेरिया पैदा करने वाले प्लाज्मोडियम परजीवी सहित कई रोगाणु मिले।

यह खोज दशकों पुरानी शंका की पुष्टि करती है कि हवा के साथ ऊंचाई पर उड़ते मच्छर रोगाणुओं को सैकड़ों किलोमीटर दूर ले जा सकते हैं।

संक्रमित मच्छरों की चौंकाने वाली संख्या

चीन, घाना, माली और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने माली और घाना में ग्रामीण इलाकों में रात के समय गुब्बारे से जाल लटकाकर 191 रातों में 1017 मादा मच्छर पकड़े, जो 61 प्रजातियों की थीं। जांच में पता चला कि करीब 8 प्रतिशत में प्लाज्मोडियम परजीवी (मलेरिया सहित), 3.5 प्रतिशत में फ्लेवीवायरस और 1.6 प्रतिशत में फाइलेरियल कृमि मिले।

इनमें डेंगू वायरस, वेस्ट नाइल वायरस, एम'पोको वायरस और पक्षियों को संक्रमित करने वाले 13 प्लाज्मोडियम प्रजातियां शामिल हैं। यह पहली बार है जब ऊंचाई पर पकड़े मच्छरों में इतनी ज्यादा संक्रमण दर पाई गई।

लंबी दूरी तक रोग फैलाने का खतरा

शोधकर्ताओं का कहना है कि ये मच्छर हवा की तेज धाराओं के साथ एक रात में सैकड़ों किलोमीटर उड़ सकते हैं और नए इलाकों में उतरकर रोग फैला सकते हैं। अब तक माना जाता था कि मच्छर जनित रोग मुख्य रूप से संक्रमित इंसान या जानवरों की यात्रा से फैलते हैं, लेकिन यह हवाई मार्ग सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के लिए नई चुनौती है।

शोध में पाया गया कि ऊंचाई पर उड़ान नियमित है, इसलिए जमीन स्तर पर निगरानी से पूरी तस्वीर नहीं मिलती, खासकर जंगली रोगाणुओं की।

स्वास्थ्य योजनाओं पर असर

वैज्ञानिकों ने सुझाया कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्रचलित हवा के गलियारों पर ध्यान देना चाहिए, हवा की दिशा में आने वाले इलाकों की निगरानी बढ़ानी चाहिए और नए संक्रमण आने पर त्वरित कार्रवाई की तैयारी रखनी चाहिए।

यह अध्ययन मच्छर जनित रोगों जैसे मलेरिया और डेंगू के फैलाव को समझने में नया आयाम जोड़ता है, जो दुनिया भर में अरबों लोगों को प्रभावित करते हैं।