विदेश डेस्क, मुस्कान कुमारी
मुंबई। अमेरिकी ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वीजा चयन प्रक्रिया में बड़े बदलाव की घोषणा के बाद भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में बुधवार को 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। नई व्यवस्था में रैंडम लॉटरी की जगह वेतन स्तर के आधार पर वेटेड चयन होगा, जो उच्च वेतन वाले कुशल कर्मियों को प्राथमिकता देगा।
उच्च कुशल और महंगे कर्मियों को मिलेगी तरजीह
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) ने मंगलवार को एच-1बी चयन प्रक्रिया बदल दी। अब वीजा आवंटन में उच्च कुशल और अधिक वेतन पाने वाले विदेशी कर्मियों को अधिक वेटेज मिलेगा। यूएससीआईएस के अनुसार, पुरानी रैंडम प्रक्रिया का दुरुपयोग कम वेतन वाले कर्मियों के आयात के लिए हो रहा था, जो अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को नुकसान पहुंचा रहा था।
नई प्रक्रिया 27 फरवरी 2026 से लागू होगी और वित्त वर्ष 2027 के एच-1बी कैप रजिस्ट्रेशन से शुरू होगी। प्रत्येक लाभार्थी के रजिस्ट्रेशन को वेतन स्तर के आधार पर कई बार चयन पूल में डाला जाएगा। लेवल IV (सर्वोच्च) को सबसे अधिक वेटेज मिलेगा, जबकि लेवल I को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं।
1 लाख डॉलर फीस पर अदालत की मुहर
भारतीय आईटी फर्मों पर मार्जिन को झटका इसके साथ ही एक संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन की नई एच-1बी आवेदनों पर 1 लाख डॉलर फीस लगाने की नीति को वैध ठहराया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों के मार्जिन पर 6-7 प्रतिशत का असर पड़ सकता है। इस साल करीब 10,000 वीजा पर 1 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा।
वर्तमान में एच-1बी वीजा का करीब 70 प्रतिशत लेवल I और II (एंट्री और मिड लेवल) कर्मियों को जारी होता है, जबकि उच्च वेतन वाले लेवल III और IV को मात्र 30 प्रतिशत। नई व्यवस्था से कम वेतन वाले आवेदनों की संभावना घट जाएगी।
शेयर बाजार में गिरावट
निफ्टी आईटी इंडेक्स पर कोफोर्ज के शेयर सबसे अधिक गिरे, करीब 2 प्रतिशत की कमी। एमफेसिस, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, विप्रो और इंफोसिस के शेयर 1 से 2 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे। टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक में भी कमजोरी दिखी।
यह बदलाव ट्रंप प्रशासन की एच-1बी सुधार नीति का हिस्सा है, जो अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा पर जोर देता है। भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर हैं, जहां हजारों कर्मी एच-1बी वीजा पर काम करते हैं।







