विदेश डेस्क- ऋषि राज
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पश्चिमी देशों द्वारा की जा रही सैन्य सहायता के क्रम में ऑस्ट्रेलिया ने यूक्रेन को एक बड़ा समर्थन देने का निर्णय लिया है। गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यूक्रेन के लिए 9.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 6.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर) के नए सैन्य सहायता पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज में यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए उन्नत सैन्य उपकरण, सुरक्षा सामग्री और तकनीकी सहायता शामिल है।
ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स, विदेश मंत्री पेनी वोंग, और रक्षा उद्योग मंत्री पैट कॉनरॉय ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि इस नई सहायता से यूक्रेन को अब तक दी गई ऑस्ट्रेलिया की कुल सैन्य सहायता 1.7 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक हो जाएगी।
नाटो की प्राथमिक सूची के आधार पर सहायता
ऑस्ट्रेलिया ने यह सहायता नाटो की प्राथमिकता सूची के आधार पर प्रदान की है। इसमें लगभग 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का योगदान ऐसे उपकरणों के लिए होगा जिन्हें नाटो ने यूक्रेन की तत्काल जरूरत बताया है। इनमें अत्यधिक आवश्यक संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण, सुरक्षित वाहन, और युद्ध के दौरान उपयोग होने वाले तकनीकी संसाधन शामिल होंगे।
इसके साथ ही 4.3 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मूल्य की सामग्री यूक्रेन को प्रत्यक्ष रूप से प्रदान की जाएगी। इनमें एयर-डिफेंस रडार, युद्ध सामग्री, और लड़ाकू इंजीनियरिंग उपकरण शामिल होंगे। ये उपकरण यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में संचालन को मजबूत करने में मदद करेंगे।
ड्रोन तकनीक को बढ़ावा
ऑस्ट्रेलिया ने यूक्रेन की ड्रोन क्षमता बढ़ाने के लिए भी 20 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के अतिरिक्त योगदान का एलान किया है। यह सहायता उन्नत ड्रोन प्रौद्योगिकी के विकास, प्रशिक्षण, और उपयोग में सहयोग करेगी। बयान के अनुसार, आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ी है और यह सहायता यूक्रेन की निगरानी एवं आक्रमण क्षमता को प्रभावी बना सकती है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष की पृष्ठभूमि में महत्व
यह सहायता ऐसे समय में आई है जब यूक्रेन को रूस के खिलाफ जारी संघर्ष में हथियार, तकनीक और रक्षात्मक उपकरणों की भारी आवश्यकता है। पश्चिमी देशों के समर्थन पर यूक्रेन की सैन्य रणनीति काफी निर्भर करती है। ऑस्ट्रेलिया का यह निर्णय न केवल यूक्रेन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दोहराता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर रणनीतिक गठबंधनों को भी मजबूत करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह कदम रूस की आलोचना को और तेज करेगा, लेकिन यूक्रेन की प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने में निर्णायक साबित हो सकता है।







