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चंपारण में बर्फीली हवाओं ने थामी रफ्तार

लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।

प्रशासन का अल्टीमेटम: "मासूमों की सेहत से खिलवाड़ किया तो खैर नहीं, निजी स्कूलों पर गिरेगी गाज"

पूर्वी चंपारण: जिले में इस वक्त कुदरत का ऐसा कहर टूट रहा है कि जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कड़ाके की ठंड और हाड़ कंपा देने वाली शीत लहर ने मोतिहारी की सड़कों पर सन्नाटा पसर दिया है। आसमान से ओस की बूंदें नहीं, बल्कि 'बर्फ की बौछारें' गिर रही हैं। इस जानलेवा मौसम और बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब बेहद सख्त और 'सर्जिकल' रुख अख्तियार कर लिया है। प्रभारी जिला अधिकारी  मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि जिले के सभी सरकारी विद्यालय 01 जनवरी तक पूरी तरह बंद।

  •  निजी स्कूलों को चेतावनी: मनमानी करने वाले प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ प्रशासन ने कसी कमर।
  • प्रभारी डीएम का आदेश: बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि, लापरवाही करने वाले संस्थानों पर होगी कानूनी कार्रवाई।
  • DEO को विशेष टास्क: जिला शिक्षा पदाधिकारी को हर स्कूल की निगरानी और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश।

'डरावने सपने' जैसी सुबह: विजिबिलिटी जीरो

मोतिहारी की गलियों और चंपारण के गांवों में सुबह का नजारा किसी डरावने सपने जैसा हो गया है। विजिबिलिटी (दृश्यता) शून्य के करीब है और ठंडी हवाएं शरीर को चीर रही हैं। मौसम विभाग की मानें तो फिलहाल राहत के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। इसी भीषण स्थिति को देखते हुए प्रभारी जिला पदाधिकारी ने मोर्चा संभाल लिया है।

हठधर्मी स्कूलों पर गिरेगी गाज

प्रशासन को सूचना मिली थी कि कुछ निजी स्कूल भीषण ठंड के बावजूद अपनी हठधर्मी दिखा रहे हैं और बच्चों को स्कूल बुला रहे हैं। इस पर प्रभारी डीएम मुकेश कुमार सिन्हा ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो स्कूल आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, उन पर तुरंत नकेल कसी जाए। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा है- "बच्चों का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसमें कोई समझौता नहीं होगा।"

प्रशासन की पैनी नजर हर उस स्कूल पर है जो इस शीतलहर में बच्चों को घर से बाहर निकलने पर मजबूर कर रहे हैं। नियम न मानने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय है: प्रशासनिक सूत्र

अभिभावकों ने ली राहत की सांस

प्रशासन की इस मुस्तैदी और सख्त आदेश के बाद उन अभिभावकों ने राहत की सांस ली है, जो अपने बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित थे। अब देखना यह है कि क्या सभी निजी स्कूल इन सरकारी आदेशों का ईमानदारी से पालन करते हैं या प्रशासन को और भी कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।

ठंड का यह दौर अभी थमा नहीं है। 'चंपारण' फिलहाल कांप रहा है और लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।