नेशन लडेस्क, श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली l चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने मांग की है कि इलेक्शन कमिश्नर की चयन समिति में मौजूदा तीन सदस्यों के अलावा दो नए सदस्यों को जोड़ा जाए, ताकि सरकार और विपक्ष के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके। उनका कहना है कि इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता मजबूत होगी।
मनीष तिवारी ने कहा कि वर्तमान चयन प्रक्रिया में संतुलन की कमी महसूस की जा रही है, जिसे दूर करना जरूरी है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि समिति की संरचना इस तरह होनी चाहिए कि उसमें दो सदस्य सरकार पक्ष से, दो सदस्य विपक्ष से और एक सदस्य भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की ओर से हों। उनके अनुसार, इस मॉडल से लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र की रीढ़ है और इसकी स्वतंत्रता और विश्वसनीयता पूरी चुनाव प्रक्रिया का आधार होती है। यदि चयन समिति में व्यापक प्रतिनिधित्व होगा, तो जनता का भरोसा इस संवैधानिक संस्था पर और मजबूत होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में सरकार का प्रभाव अधिक दिखाई देता है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। इसलिए उन्होंने चयन पैनल का विस्तार करने की जरूरत बताई, ताकि सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो और निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित हो सके।
तिवारी ने आगे कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा विषय है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करें और संविधान की भावना के अनुरूप सुधारों का समर्थन करें।
राजनीतिक गलियारों में तिवारी के इस बयान के बाद हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर व्यापक बहस हो सकती है, जिससे चुनाव सुधारों की दिशा में नई चर्चा शुरू हो सकती है।
उनका मानना है कि पारदर्शी और संतुलित चयन प्रक्रिया देश के लोकतंत्र को और मजबूत आधार प्रदान करेगी।







