नेशनल डेस्क, वेरॉनिका राय |
110 चक्कों के ट्रेलर पर 1.8 लाख किलो का विशाल शिवलिंग: चेन्नई से चंपारण तक आस्था का अद्भुत सफर, जहां-जहां से गुजर रहा शिवलिंग, वहां उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
चेन्नई/बिहार: चेन्नई से बिहार के पूर्वी चंपारण तक आस्था और भक्ति का एक ऐतिहासिक दृश्य इन दिनों देश की सड़कों पर देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु के चेन्नई में निर्मित 30 फीट ऊंचा और 1 लाख 80 हजार किलो वजनी विशाल शिवलिंग विशेष ट्रेलर के जरिए बिहार ले जाया जा रहा है। इस शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा पूर्वी चंपारण जिले के जानकीनगर स्थित कैथवलिया गांव में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में की जानी है।
यह विशालकाय शिवलिंग 110 चक्कों वाले विशेष ट्रेलर पर लदा हुआ है, जिसे देखने के लिए रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। जैसे ही यह काफिला किसी शहर या कस्बे से गुजरता है, लोग फूल-मालाओं, धूप-दीप और मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने पहुंच जाते हैं। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने सड़क किनारे ही अस्थायी पूजा स्थल बनाकर भगवान शिव का अभिषेक भी किया।
फिलहाल यह शिवलिंग जबलपुर से नागपुर की ओर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) से गुजर रहा है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि इतने भारी और विशाल ट्रेलर की आवाजाही सुचारू रूप से हो सके। ट्रेलर की गति धीमी रखी गई है और हर कुछ किलोमीटर पर तकनीकी जांच भी की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतने भारी शिवलिंग का निर्माण और उसका परिवहन अपने आप में एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि लंबी दूरी तय करते समय किसी प्रकार की क्षति न हो। शिवलिंग को मजबूत स्टील फ्रेम और विशेष सपोर्ट सिस्टम से सुरक्षित किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा दृश्य उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। कई श्रद्धालु इसे अपने जीवन का सौभाग्य मान रहे हैं कि उन्हें चलते-फिरते शिवलिंग के दर्शन का अवसर मिल रहा है। लोगों का विश्वास है कि इस शिवलिंग की स्थापना से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
चंपारण पहुंचने के बाद शिवलिंग को विधि-विधान के साथ विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया जाएगा। इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में देश-विदेश से संत, महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यह यात्रा न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि आस्था, तकनीक और संस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक बन चुकी है।







