हेल्थ डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली: बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण और मौसम के असर ने सर्दी-खांसी, कमजोर इम्युनिटी और श्वसन संबंधी समस्याओं को हर उम्र के लोगों की आम परेशानी बना दिया है। ऐसे समय में लोग अपने खान-पान और स्वास्थ्य को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो गए हैं। आयुर्वेद में सदियों से उपयोग में आ रहा च्यवनप्राश आज भी स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसेमंद विकल्प माना जा रहा है, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ कई रोगों से बचाव में मदद करता है।
च्यवनप्राश एक प्राचीन आयुर्वेदिक आहार सप्लीमेंट है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद और चरक संहिता जैसे ग्रंथों में मिलता है। इसे खांसी, अस्थमा और सांस से जुड़ी अन्य समस्याओं में लाभकारी बताया गया है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, च्यवनप्राश कमजोर होती कोशिकाओं को पोषण देता है और शरीर की कार्यक्षमता को बनाए रखने में सहायक होता है। इसके नियमित सेवन से ताकत, स्टैमिना और स्फूर्ति में वृद्धि होती है, जिससे व्यक्ति खुद को अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
आयुर्वेद के अनुसार, च्यवनप्राश शरीर के तीनों दोष—वात, पित्त और कफ—को संतुलित करने में मदद करता है। यह संतुलन शरीर की आंतरिक ऊर्जा और जैविक क्रियाओं को बेहतर ढंग से संचालित करता है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं, बल्कि एंटी-एजिंग गुणों के कारण बढ़ती उम्र के प्रभाव को भी धीमा करते हैं।
आधुनिक समय में डाबर च्यवनप्राश जैसे उत्पाद पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और वैज्ञानिक रिसर्च के संयोजन से तैयार किए जा रहे हैं। इसके निर्माण में आंवला मुख्य घटक होता है, जो गैलिक एसिड और पॉलीफेनॉल्स से भरपूर है। ये तत्व एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाने जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूती देने और पुनर्जीवित करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा इसमें 40 से अधिक जड़ी-बूटियां शामिल की जाती हैं, जो मिलकर इसे एक संतुलित स्वास्थ्य टॉनिक बनाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, च्यवनप्राश का सबसे बड़ा लाभ इम्युनिटी को बढ़ाना है। यह शरीर में एंटीबॉडी के स्तर को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे संक्रमण और एलर्जी से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि च्यवनप्राश के नियमित सेवन से एलर्जिक प्रतिक्रियाओं और हिस्टामाइन के स्तर में कमी आ सकती है, जो इसकी एंटी-एलर्जिक क्षमता को दर्शाता है।
डाबर च्यवनप्राश को तैयार करने की प्रक्रिया में आयुर्वेदिक सिद्धांतों के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसमें विभिन्न बोटैनिकल एक्सट्रैक्ट, गाय का घी, तिल का तेल और सुगंधित जड़ी-बूटियों का संतुलित मिश्रण होता है। यही कारण है कि यह वर्षों से हर भारतीय परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बना हुआ है।
कुल मिलाकर, च्यवनप्राश केवल एक पारंपरिक औषधि नहीं, बल्कि आज के समय में इम्युनिटी बढ़ाने, ऊर्जा देने और संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रखने का एक प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय माना जा रहा है।







