लोकल डेस्क, एन के सिंह।
SDPO पकड़ीदयाल कुमार चंदन और टीम को प्रशस्ति पत्र और 25k की नक़द राशि से सम्मानित किया जाएगा।
बिजली तार से लेकर भगवान के मुकुट तक: 'इमामुल गैंग' के काले साम्राज्य का अंत शुरू, SP स्वर्ण प्रभात की रणनीति और DSP कुमार चंदन के सटीक इनपुट ने तोड़ी अपराधियों की कमर।
मोतिहारी/गोपालगंज: पुलिस ने अपराध के विरुद्ध एक ऐसी बड़ी सफलता हासिल की है, जिसने अंतर-जिला अपराधी गिरोहों के बीच खौफ पैदा कर दिया है। प्रसिद्ध थावे मंदिर में हुई करोड़ों की चोरी मामले में पुलिस ने मुख्य सरगना इजमामूल को एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि गोपालगंज पुलिस की इस कामयाबी के पीछे मोतिहारी पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के कुशल नेतृत्व में गठित एसआईटी और पकड़ीदयाल डीएसपी कुमार चंदन का वह 'मास्टर इनपुट' था, जिसने अपराधी के ठिकाने को बेनकाब कर दिया।
मुठभेड़ और बरामदगी: रिखई टोला में रणक्षेत्र बनी सड़क
गोपालगंज के थावे थाना क्षेत्र के रिखई टोला में पुलिस और अपराधियों के बीच सीधी मुठभेड़ हुई। खुद को घिरा देख इमामुल गैंग ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। इस मुठभेड़ में गिरोह का सरगना इमामुल गोली लगने से घायल हो गया, जिसे फिलहाल गोपालगंज सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने उसके पास से 17 दिसंबर की रात थावे मंदिर से चोरी हुए सोने के मुकुट का हिस्सा बरामद कर लिया है।
मोतिहारी कनेक्शन: कैसे खुला राज?
इस बड़ी कामयाबी की पटकथा 4 दिन पहले मोतिहारी में लिखी गई थी। मोतिहारी पुलिस ने चकिया और पकड़ीदयाल क्षेत्र से एक बड़े बिजली तार चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 5 अपराधियों को जेल भेजा था। इन्ही अपराधियों से पूछताछ के दौरान डीएसपी कुमार चंदन की टीम को थावे मंदिर चोरी कांड के तार इमामुल गैंग से जुड़ते दिखे।
"हमने इमामुल का मोबाइल नंबर, सटीक लोकेशन और फोटो गोपालगंज पुलिस के साथ साझा किया था। हमारे द्वारा पकड़े गए तार चोरों ने ही इस गिरोह के थावे मंदिर में संलिप्तता के संकेत दिए थे।" — स्वर्ण प्रभात, पुलिस अधीक्षक, मोतिहारी
अपराध का 'बिजनेस मॉडल': खेत से रसोई तक का सफर
पुलिस की जांच में इमामुल गिरोह के काम करने का चौंकाने वाला Modus Operandi सामने आया है। यह गिरोह सिर्फ चोरी नहीं करता था, बल्कि एक संगठित उद्योग चला रहा था:
टारगेट: रात के अंधेरे में कृषि फीडरों से बिजली के तार काटना।
प्रोसेसिंग: गुप्त ठिकानों पर आधुनिक मशीनों से तार को गलाना।
फिनिशिंग: चोरी के एल्युमिनियम से बर्तन तैयार करना, ताकि पुलिस को कभी शक न हो।
सप्लाई चेन: तैयार बर्तनों और कच्चे माल को उत्तर प्रदेश की मंडियों में खपाना।
इन थानों ने ली राहत की सांस
इमामुल और उसके गिरोह की गिरफ्तारी से मोतिहारी के फेनहारा, पताही, घोड़ासहन और गड़हिया जैसे इलाकों के किसानों ने राहत की सांस ली है। तार चोरी के कारण महीनों से सिंचाई ठप थी, जिससे किसान आक्रोशित थे। पकड़े गए अपराधियों में सर्वेश कुमार, विनोद कुमार, रंजन कुमार और बब्लू कुमार जैसे शातिर हिस्ट्रीशीटर शामिल हैं।
अपराधी का प्रोफाइल
घायल अपराधी इमामुल मोतिहारी के गोविन्दगंज थाना क्षेत्र के राजेपुर का रहने वाला है। हालांकि मोतिहारी में उसका पहले का बड़ा रिकॉर्ड नहीं मिला था, लेकिन वह पूर्व में आर्म्स एक्ट में जेल जा चुका है। गोपालगंज के सदुआकोठी (मोहम्मदपुर) में उसका ननिहाल है, जहां छिपकर वह अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता था।
टीम वर्क की मिसाल
इस पूरे ऑपरेशन में चकिया एसडीपीओ संतोष कुमार, पकड़ीदयाल डीएसपी कुमार चंदन, थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार, बवन कुमार और ब्रजेश कुमार की टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया। पुलिस अब इस गिरोह के उत्तर प्रदेश के कनेक्शनों को खंगाल रही था।
बड़ी चेतावनी: पुलिस के मुताबिक, मंदिर की गरिमा और किसानों की मेहनत पर हाथ डालने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। यह ऑपरेशन बिहार पुलिस के अंतर-जिला समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है।







