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दहेज प्रथा समाज पर कलंक है: राजकुमार राव

एंटरटेनमेंट डेस्क, वरॉनिका राय |

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सामने आई 23 वर्षीय मनीषा गोस्वामी की आत्महत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शादी के सिर्फ 10 महीने बाद दहेज उत्पीड़न से तंग आकर मनीषा ने अपनी जान दे दी। मरने से पहले उसने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने अपने पति आशुतोष गोस्वामी, उसके भाई और ससुराल वालों पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए।

यह घटना सामने आने के बाद बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव ने भी गहरा दुख और गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने मंगलवार (28 अक्टूबर) को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर मनीषा का वायरल वीडियो साझा करते हुए लिखा “बहुत दुखद खबर। अब समय आ गया है कि हम अपने देश में इस भयावह दहेज प्रथा को हमेशा के लिए खत्म करें। एक-दूसरे को प्रेरित करें कि इस कुप्रथा से बचें। दहेज को ‘ना’ कहें।”राजकुमार राव के इस बयान को लोगों का काफी समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने मनीषा के लिए न्याय की मांग करते हुए पोस्ट शेयर किए हैं। कई लोगों का कहना है कि जब तक समाज खुद नहीं बदलेगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं।

मनीषा ने अपने आखिरी वीडियो में कहा था,
 “मैं अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी हूं और मेरे पिता अकेले कमाने वाले हैं। मैं ससुराल वालों के अत्याचार से थक चुकी हूं। मेरे पति ने दो बार बिना किसी कारण मुझ पर हमला किया, और मेरी सास ने भी कभी मेरा साथ नहीं दिया।” मनीषा ने यह भी बताया था कि शादी के बाद से उसे लगातार दहेज को लेकर ताने दिए जाते थे। उसने कहा था कि “मेरी शादी को 10 महीने हुए हैं, लेकिन मुझे 10 दिन की भी खुशी नहीं मिली।”

घटना के बाद मनीषा के पिता ने डीडी नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया और सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने पति, ससुराल पक्ष और पड़ोसियों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच टीम अब मनीषा के मोबाइल फोन और डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।इस घटना ने एक बार फिर समाज में फैली दहेज प्रथा की क्रूर सच्चाई को उजागर किया है। हर साल भारत में सैकड़ों महिलाएं दहेज उत्पीड़न का शिकार होती हैं। मनीषा का यह कदम एक कठोर चेतावनी है कि यदि समाज ने अब भी अपनी सोच नहीं बदली, तो ऐसी घटनाएं थमने वाली नहीं हैं। राजकुमार राव के शब्दों में – “अब वक्त है जागने का, अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाने का। दहेज को हमेशा के लिए ‘ना’ कहने का।”यह घटना सिर्फ एक  परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी का सवाल बन गई है।