लोकल डेस्क, आर्या कुमारी।
दारौंदा प्रखंड का झोर क्षेत्र, जिसे यहां का प्रमुख जल-संचय इलाका माना जाता है, लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। जल निकासी बाधित होने से हर साल सैकड़ों एकड़ फसलें बर्बाद होती हैं और किसान भारी नुकसान झेलते हैं। झोर के तल क्षेत्र में जमा गाद और अवरुद्ध नालों ने इस इलाके को दस से अधिक पंचायतों के लिए बड़ी समस्या बना दिया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि झोर की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था सुधार दी जाए, तो यही क्षेत्र विकास का आधार बन सकता है।
थाना नंबर 188 के अंतर्गत करीब 88 बिगहे में फैला झोर एक बेचिरागी गांव के रूप में दर्ज है, जिसके आसपास की सैकड़ों एकड़ जमीन खेती योग्य है। पहले बांध, पईन, नहर और पोखरों के जरिए बरसाती पानी आसानी से झोर में पहुंच जाता था, लेकिन इन मार्गों के बंद हो जाने से पानी निकलने का रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है। इससे हड़सर, सिरसांव, कोड़ाडी कला, जलालपुर, रमसापुर, कोथुआं सांरगपुर और रुकुंदीपुर के कई इलाकों में लगातार जल जमाव बना रहता है। यहां आज भी कई घर पानी में डूबे हैं और प्रखंड मुख्यालय के आसपास भी स्थिति बदतर है। स्थानीय कार्यकर्ता बीरेंद्र ठाकुर का कहना है कि झोर की सफाई मात्र से लोगों की जिंदगी बदल सकती है और किसानों की आय में भारी वृद्धि हो सकती है।
झोर को केवल जलनिकासी तक सीमित न रखते हुए पंचायतें चाहें तो इसे विकास का बड़ा केंद्र भी बना सकती हैं। तैराकी के प्रशिक्षण के लिए यहां स्विमिंग क्लब स्थापित किया जाए तो इलाके की बेटियां पायल पंडित की तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकती हैं। यह क्षेत्र युवाओं को खेल प्रशिक्षण देने के लिए उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है, जिससे दारौंदा की पहचान खेल मानचित्र पर भी दर्ज होगी।
इसके अलावा झोर में बोटिंग क्लब शुरू होने से पंचायतों को राजस्व मिलेगा और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मत्स्य पालन के लिए यह क्षेत्र पहले से ही उपयुक्त है; पीपीपी मॉडल पर यहां फिशरी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित हो सकता है, जिससे युवाओं को रोजगार व तकनीकी प्रशिक्षण मिल सकेगा। झोर के दोनों किनारों पर सड़कों का निर्माण होने से दारौंदा की सूरत पूरी तरह बदल सकती है, और आसपास के गांवों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। आईटीआई कॉलेज, प्लस-टू स्कूल और मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों को भी बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की मानें तो झोर को पर्यटन, खेल और रोजगार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। पैक्स अध्यक्ष संजीव सिंह का कहना है कि मेरिन ड्राइव, स्विमिंग सेंटर और मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होने से यह क्षेत्र शहर जैसी सुविधाओं से लैस हो जाएगा। वहीं समाजसेवी डॉ. बलिराम सिंह का मानना है कि झोर का सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था और मनोरंजन सुविधाएँ दारौंदा को नई पहचान देंगी। अंतरराष्ट्रीय मानकों के स्विमिंग पूल और प्रशिक्षकों से यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकेंगे।
झोर, जो आज समस्या की तरह दिखता है, दरअसल दारौंदा की उन्नति और पहचान का सबसे बड़ा आधार बन सकता है।







