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दिल्ली-NCR में प्रदूषण का 'प्रलय': AQI 500 के करीब

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का 'प्रलय': AQI 500 के करीब, स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू और कोहरे से जनजीवन अस्त-व्यस्त

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (NCR) में हवा की गुणवत्ता एक बार फिर "आपातकालीन" स्तर पर पहुंच गई है। सोमवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 से 500 के बीच दर्ज किया गया, जो 'गंभीर प्लस' श्रेणी में आता है। प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। साथ ही, दिल्ली अब दोहरी मार झेल रही है—एक तरफ जहरीला स्मॉग और दूसरी तरफ सीजन का सबसे घना कोहरा, जिसने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

प्रदूषण के बढ़ते खतरों, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सरकार और शिक्षा निदेशालय ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आज से कक्षा 1 से 9 और कक्षा 11 के छात्रों के लिए स्कूलों को हाइब्रिड मोड पर चलाने का निर्देश दिया गया है। इसका अर्थ है कि अब इन कक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के विकल्प मौजूद रहेंगे, ताकि बच्चों को जहरीली हवा में बाहर न निकलना पड़े। हालांकि, बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को देखते हुए कक्षा 10 और 12 के लिए शारीरिक रूप से स्कूल जाने का नियम फिलहाल जारी रह सकता है, लेकिन वहां भी बाहरी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर का प्रदूषण फेफड़ों और हृदय के लिए बेहद घातक है, इसलिए स्कूलों में हाइब्रिड मॉडल लागू करना एक अनिवार्य कदम था।

दूसरी ओर, दिल्ली आज सुबह सफेद चादर में लिपटी नजर आई। घने कोहरे के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) और आसपास के क्षेत्रों में विजिबिलिटी (दृश्यता) शून्य से 50 मीटर के बीच रही। इस शून्य दृश्यता का सीधा असर यातायात पर पड़ा है। दिल्ली आने और यहाँ से उड़ान भरने वाली लगभग 50 से अधिक उड़ानों में देरी हुई है, जबकि कुछ को डायवर्ट करना पड़ा है। रेल यातायात की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है; उत्तर भारत की ओर आने वाली 20 से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 3 से 6 घंटे की देरी से चल रही हैं। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है और एक्सप्रेसवे पर हादसों की आशंका को देखते हुए पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की कम गति और गिरते तापमान के कारण प्रदूषक तत्व जमीन की सतह के करीब फंस गए हैं। पराली जलाने की घटनाओं और स्थानीय उत्सर्जन (वाहनों और निर्माण कार्य) ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे चरण की पाबंदियां पहले से ही लागू हैं, जिसमें गैर-जरूरी ट्रकों के प्रवेश पर रोक और निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध शामिल है। स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम के समय घर से बाहर न निकलें और यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो उच्च गुणवत्ता वाले N-95 मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। आने वाले दो-तीन दिनों तक मौसम की स्थिति में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, जिससे राहत मिलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।