हेल्थ डेस्क, मुस्कान कुमारी
न्यूयॉर्क। एक नई मोनोक्लोनल एंटीबॉडी 'नेबोकिटुग' दुर्लभ लीवर रोग प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलेंजाइटिस (PSC) के मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि फेज-2 ट्रायल में इसने लीवर में सूजन और फाइब्रोसिस को कम करने में सफलता दिखाई है।
अब तक इस रोग का एकमात्र इलाज लीवर ट्रांसप्लांट था, लेकिन यह नई दवा हजारों मरीजों की जिंदगी बदल सकती है।
PSC क्या है, क्यों खतरनाक
प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलेंजाइटिस लीवर की बाइल डक्ट्स में सूजन और स्कारिंग का क्रॉनिक रोग है, जो बाइल के बहाव को रोकता है और लीवर को स्थायी नुकसान पहुंचाता है। यह फाइब्रोसिस से सिरोसिस तक पहुंच जाता है। हर 10 हजार में एक व्यक्ति प्रभावित होता है, ज्यादातर 30-60 साल के पुरुष, खासकर अल्सरेटिव कोलाइटिस वाले मरीज।
लक्षणों में थकान, खुजली, पेट दर्द, पीलिया, वजन घटना और संक्रमण शामिल हैं। रोग अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ता है और जांच में पता चलता है। मरीजों में बाइल डक्ट कैंसर का खतरा 10-20 गुना बढ़ जाता है।
अब तक इलाज की सीमाएं
वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली दवा उर्सोडियोक्सीकोलिक एसिड (UDCA) ज्यादातर मरीजों में फायदा नहीं देती। यह लक्षण कम करती है, लेकिन लीवर डैमेज रोकने या जिंदगी बढ़ाने में असफल रहती है। संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स और ब्लॉक डक्ट्स के लिए स्टेंट अस्थायी समाधान हैं। अंतिम चरण में लीवर ट्रांसप्लांट ही विकल्प बचता है, लेकिन ऑर्गन की कमी और रिजेक्शन का खतरा बना रहता है।
नेबोकिटुग ने दिखाई उम्मीद की किरण
नेबोकिटुग एक प्रयोगात्मक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है, जो लीवर में सूजन और फाइब्रोसिस के विशिष्ट रास्तों को निशाना बनाती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-डेविस के नेतृत्व में पांच देशों के 76 PSC मरीजों पर फेज-2 ट्रायल हुआ। मरीजों को हर तीन हफ्ते में 15 हफ्तों तक इंट्रावेनस डोज दी गई।
ट्रायल का मुख्य लक्ष्य सुरक्षा था और नेबोकिटुग पूरी तरह सुरक्षित साबित हुई। कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखा गया। उच्च डोज लेने वाले गंभीर स्कारिंग वाले मरीजों में लीवर स्टिफनेस और PRO-C3 फाइब्रोसिस मार्कर में प्लेसिबो ग्रुप की तुलना में कमी आई।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी के चीफ क्रिस्टोफर बाउलस ने कहा, "ट्रायल में नेबोकिटुग ने PSC मरीजों की जिंदगी बदलने की क्षमता दिखाई है, क्योंकि यह फाइब्रोसिस और सूजन कम करती है, जिससे बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।"
आगे की राह और महत्व
ट्रायल में सिर्फ हल्के इन्फ्यूजन संबंधी प्रभाव देखे गए, जो प्लेसिबो ग्रुप में भी समान थे। अब फेज-3 ट्रायल की योजना है, जो दवा की प्रभावशीलता को लीवर स्वास्थ्य, ट्रांसप्लांट की जरूरत टालने और सर्वाइवल में सुधार के आधार पर जांचेगा। सफल होने पर यह दवा मरीजों के लिए उपलब्ध हो सकेगी।
यह खोज दुर्लभ लीवर रोगों के इलाज में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की नई संभावनाएं खोलती है। PSC मरीजों को कम वसा वाला आहार, वजन नियंत्रण, शराब से परहेज, हल्की एक्सरसाइज और सपोर्ट ग्रुप की सलाह दी जाती है।







