बिजनेस डेस्क, मुस्कान कुमारी |
नई दिल्ली: भारत सरकार ने सभी नई स्मार्टफोन पर अपना आधिकारिक साइबर सेफ्टी ऐप ‘संचार साथी’ पहले से इंस्टॉल करने का आदेश जारी किया है। यह नियम पिछले हफ्ते पारित हुआ और सोमवार को सार्वजनिक किया गया। आदेश के अनुसार अगले 90 दिनों में भारत में बिकने वाले हर नए फोन में यह ऐप पहले से मौजूद होगी और इसकी सुविधाओं को अक्षम या सीमित नहीं किया जा सकेगा।
ऐप हटाने की छूट, पर तरीका स्पष्ट नहीं
विवाद बढ़ने के बाद संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोशल मीडिया पर सफाई दी कि ऐप पूरी तरह स्वैच्छिक है। यूजर्स चाहें तो इसे कभी भी डिलीट कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि जब ऐप की सुविधाओं को “अक्षम या सीमित” करने पर पूरी तरह रोक है, तब इसे कैसे अनइंस्टॉल किया जाएगा।
इतनी व्यापक पहुंच क्यों?
संचार साथी ऐप को फोन के कैमरा, माइक्रोफोन, कॉल लॉग, मैसेज, फोटो, फाइल्स और यहां तक कि फोन कॉल करने-मैनेज करने तक की अनुमति चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि ये अनुमतियां सामान्य से कहीं ज्यादा हैं और इससे बड़े स्तर पर निगरानी की आशंका पैदा होती है।
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने इसे “राज्य-प्रायोजित जबरन सॉफ्टवेयर” करार दिया है जिसे यूजर नकार नहीं सकता, नियंत्रित नहीं सकता और हटा भी नहीं सकता।
सरकार का तर्क : डुप्लीकेट IMEI और चोरी के फोन पर लगाम
टेलीकॉम विभाग का कहना है कि भारत में डुप्लीकेट या फर्जी IMEI वाले फोन बड़ी संख्या में बिक रहे हैं। चोरी हुए या ब्लैकलिस्ट फोन को नया IMEI देकर दोबारा बेचा जा रहा है। इससे साइबर सुरक्षा को खतरा है और खरीदार अनजाने में अपराध का हिस्सा बन जाता है।
विभाग के अनुसार इस ऐप की मदद से अब तक 7 लाख से ज्यादा चोरी हुए फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें अकेले अक्टूबर में 50 हजार फोन शामिल हैं।
कंपनियों पर दबाव, ऐप्पल कर सकती है इनकार
आदेश में सभी स्मार्टफोन निर्माताओं को 90 दिन में नई डिवाइस पर ऐप डालने और 120 दिन में अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा गया है। पुरानी लेकिन अभी तक नहीं बिके फोन पर भी सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए ऐप डालने को कहा गया है।
ज्यादातर कंपनियां बिक्री से पहले किसी तीसरे पक्ष या सरकारी ऐप को प्री-इंस्टॉल करने की मनाही करती हैं। सूत्रों के मुताबिक ऐप्पल इस आदेश का पालन करने से इनकार करने की तैयारी में है और वह अपनी आपत्ति दिल्ली को औपचारिक रूप से भेजेगा।
भारत अकेला नहीं, रूस ने भी उठाया ऐसा कदम
इस साल अगस्त में रूस ने भी सभी नए फोन और टैबलेट पर सरकारी मैसेंजर ऐप MAX पहले से इंस्टॉल करने का आदेश दिया था। वहां भी गोपनीयता और निगरानी को लेकर भारी विरोध हुआ था।
विशेषज्ञ बोले – पारदर्शिता जरूरी
तकनीकी विश्लेषक प्रसांतो के. रॉय ने कहा, “हम यह नहीं देख सकते कि ऐप अंदर क्या कर रही है, लेकिन जो अनुमतियां मांग रही है वह फ्लैशलाइट से लेकर कैमरा तक सबकुछ कवर करती हैं। यह अपने आप में चिंताजनक है।”
गूगल प्ले स्टोर पर ऐप का दावा है कि वह कोई डेटा कलेक्ट या शेयर नहीं करती, लेकिन विशेषज्ञों ने इस दावे पर संदेह जताया है।







