लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।
हादसे में न्याय के बजाय सौदेबाजी का आरोप साबित हुआ। आरोपी पक्ष से संपर्क के सबूत जांच में सामने आए।
पूर्वी चंपारण: पुलिस की वर्दी को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया है। बेतिया प्रक्षेत्र के डीआईजी हरकिशोर राय ने यह साफ कर दिया है कि वर्दी पहनकर सौदेबाजी करने वालों के लिए पुलिस विभाग में कोई जगह नहीं है। सुगौली ट्रैक्टर हादसे से जुड़े एक मामले में भ्रष्टाचार और गंभीर लापरवाही के आरोपों की पुष्टि होते ही डीआईजी ने कड़ा कदम उठाते हुए इंस्पेक्टर और अनुसंधानकर्ता दोनों को निलंबित कर दिया।
पूरा मामला 15 अगस्त 2025 को सुगौली में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। ऐसी घटनाओं में पुलिस से त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है, लेकिन यहां जांच की दिशा ही भटकती नजर आई। जांच में सामने आया कि सुगौली में पदस्थापित इंस्पेक्टर अशोक कुमार पाण्डेय ने आरोपी ट्रैक्टर मालिक को बचाने के लिए 60 हजार रुपये की डील की और मामले को कमजोर करने की कोशिश की।
इतना ही नहीं, केस को कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचाने के बजाय ‘पंचायती’ के जरिये रफा-दफा करने का प्रयास किया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ट्रैक्टर मालिक का भाई खुद पुलिस विभाग में कार्यरत है। इसी कड़ी में इंस्पेक्टर और आरोपी पक्ष के बीच लगातार संपर्क रहा, जिसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया।
मामले ने तब गंभीर मोड़ लिया, जब मृतक की पत्नी इमतरी खातून, जो अब विधवा हैं, न्याय की तलाश में एसपी के जनता दरबार पहुंचीं। वहां उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया गया और डीआईजी हरकिशोर राय के निर्देश पर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई गई। यह जांच प्रोबेशनर डीएसपी ऋषभ कुमार को सौंपी गई, जिन्होंने तथ्यों, दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार और लापरवाही की पुष्टि की।
जांच रिपोर्ट के आधार पर डीआईजी ने सुगौली के इंस्पेक्टर अशोक कुमार पाण्डेय को रिश्वतखोरी, अभियुक्त को बचाने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप में निलंबित कर दिया। वहीं, मामले की अनुसंधानकर्ता सब-इंस्पेक्टर निधि कुमारी को जांच में घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड किया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
डीआईजी हरकिशोर राय ने साफ शब्दों में कहा है कि बाहरी दबाव, निजी संबंध या पैसों के लालच में पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पुराने मामलों की समीक्षा की जा रही है और जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां कार्रवाई तय होगी।
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि, जनता दरबार में आवेदिका आई थी, पति की ट्रेक्टर द्वारा धक्का लगने पर मृत्यु हो गई थी और CI केस को रफा दफा कर रहे थे। ट्रेक्टर मालिक का भाई बिहार पुलिस में ही दरोगा है और CI का बैचमेट है। बैचमेट के प्रभाव में आकर अनुसंधान को प्रभावित किया. अभियुक्त को बचाने का प्रयास.
प्रशिक्षु DYSP द्वारा पूरी जाँच की गई। जांच में गंभीर आरोप पाए गए। पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर निलंबित करने की अनुशंसा की गई है।







