नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी |
योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि पर कम गुणवत्ता वाला गाय घी बेचने का आरोप लगाया गया है। इसी मामले में अदालत ने कंपनी के घी निर्माता और वितरक पर 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि, पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण और कानून-विरुद्ध बताते हुए अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
सैंपल फेल होने पर लगा जुर्माना
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पतंजलि घी के सैंपल फेल पाए जाने के बाद ADM कोर्ट ने निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता पर राज्य और केंद्रीय लैब की रिपोर्ट के आधार पर क्रमशः 1.25 लाख और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया। पिथौरागढ़ के सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त आरके शर्मा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 46/4 के अंतर्गत तीनों पर मामला दर्ज किया गया था और 19 नवंबर को अदालत ने फैसला सुनाया, जिसकी कॉपी अब प्राप्त हुई है। शर्मा के अनुसार, अक्टूबर 2020 में एकत्र किए गए सैंपल रुद्रपुर की राज्य लैब में असफल पाए गए। बाद में व्यापारियों के आग्रह पर सितंबर 2021 में सैंपल केंद्रीय लैब भेजे गए, जहां 2022 में भी वे फेल घोषित हुए। इसके बाद 17 फरवरी 2022 को एसडीएम कोर्ट में केस दर्ज करने का निर्देश मिला था, जिसका फैसला हाल ही में आया।
कोर्ट के आदेश पर पतंजलि की प्रतिक्रिया
पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने अपने आधिकारिक ‘X’ अकाउंट पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर सामने आया यह आदेश कई स्तरों पर त्रुटिपूर्ण है। कंपनी का कहना है कि रेफरल लैब, जहां परीक्षण किया गया, NABL से मान्यता प्राप्त नहीं थी, इसलिए वहां की रिपोर्ट कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी जा सकती। कंपनी ने इसे आपत्तिजनक बताया कि एक निम्न-स्तरीय लैब ने उनके शुद्ध गाय घी को सब-स्टैंडर्ड बताया। उनका तर्क है कि जिन पैरामीटरों के आधार पर घी को असफल घोषित किया गया, वे उस समय लागू ही नहीं थे, इसलिए उनका इस्तेमाल करना विधिक रूप से गलत है। इसके अलावा, दोबारा परीक्षण तब किया गया जब सैंपल की एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी थी, जिससे परिणाम स्वतः ही अमान्य हो जाते हैं। पतंजलि का कहना है कि इन महत्वपूर्ण बिंदुओं की अनदेखी करते हुए आदेश पारित किया गया है, इसलिए वे इस निर्णय के खिलाफ फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील कर रहे हैं और उन्हें भरोसा है कि फैसला उनके पक्ष में आएगा।
पतंजलि का दावा घी सुरक्षित, सिर्फ RM Value में हल्का अंतर
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि फैसले में कहीं नहीं कहा गया कि पतंजलि का गाय घी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। मुद्दा केवल RM Value में मामूली अंतर का है, जो घी में मौजूद volatile fatty acid के स्तर को दर्शाता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और घी की गुणवत्ता पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। पतंजलि का कहना है कि RM Value जलवायु, क्षेत्रीय परिस्थितियों और पशुओं के आहार के अनुसार बदलती रहती है, और FSSAI भी समय-समय पर इसके मानकों में परिवर्तन करता रहा है। कंपनी ने दावा किया कि वे पूरे देश से सख्त मानकों और परीक्षणों के आधार पर दूध और घी इकट्ठा करते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी आपूर्ति करते हैं।







