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पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य 'इको-सेंसिटिव जोन' घोषित

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य के चारों ओर के क्षेत्र को 'इको-सेंसिटिव जोन' (ESZ) घोषित कर दिया है। यह निर्णय पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र की जैव विविधता को सुरक्षित रखने और मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है। पार्वती-अरगा अभयारण्य न केवल उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय महत्व की एक रामसर साइट भी है। सरकार के इस कदम से अभयारण्य के आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को एक सुरक्षा घेरा प्राप्त होगा, जिससे यहाँ आने वाले प्रवासी पक्षियों और स्थानीय वन्यजीवों के आवास को संरक्षित किया जा सकेगा।

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य लगभग 1,085 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें दो मुख्य झीलें, पार्वती और अरगा शामिल हैं, जो आपस में जुड़ी हुई हैं। यह क्षेत्र मध्य एशियाई उड़ान मार्ग (Central Asian Flyway) पर स्थित है, जहाँ हर साल सर्दियों में हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं। 'इको-सेंसिटिव जोन' की घोषणा के बाद, अभयारण्य की सीमाओं के बाहर एक निश्चित दायरे (अक्सर 1 किलोमीटर या उससे अधिक) को बफर जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र में अब किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि, भारी निर्माण कार्य और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की स्थापना पर पूर्णतः प्रतिबंध या कड़ा नियंत्रण रहेगा।

प्रतिबंधित और विनियमित गतिविधियाँ
इको-सेंसिटिव जोन घोषित होने के बाद, इस क्षेत्र में गतिविधियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  • निषिद्ध (Prohibited): किसी भी प्रकार का खनन, पत्थर उत्खनन, बड़े पैमाने पर जलविद्युत परियोजनाएं और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग अब इस क्षेत्र में नहीं चलाए जा सकेंगे।
  • विनियमित (Regulated): पेड़ों की कटाई, होटल और रिसॉर्ट्स का निर्माण, और भूमि उपयोग में परिवर्तन केवल सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बाद ही संभव होगा।
  • अनुमत (Permitted): स्थानीय समुदायों द्वारा की जाने वाली पारंपरिक कृषि, जैविक खेती और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन (Eco-tourism) को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस घोषणा का प्राथमिक लक्ष्य प्रदूषण को कम करना और वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित करना है। अभयारण्य के आसपास बढ़ते शहरीकरण और शोर-शराबे के कारण पक्षियों के प्रजनन चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। अब शोर प्रदूषण और प्रकाश प्रदूषण पर नियंत्रण से प्रवासी पक्षियों के लिए एक शांतिपूर्ण वातावरण तैयार होगा। साथ ही, यह कदम भूजल स्तर को बनाए रखने और स्थानीय वनस्पतियों को संरक्षित करने में भी सहायक सिद्ध होगा। यद्यपि कुछ विकास कार्यों पर सीमाएं लगेंगी, लेकिन सरकार का मानना है कि यह 'सतत विकास' (Sustainable Development) की दिशा में एक अनिवार्य कदम है।

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य को इको-सेंसिटिव जोन घोषित करना उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को बचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह न केवल पारिस्थितिकी तंत्र के असंतुलन को रोकेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए इस अनमोल जैविक विविधता को जीवित रखने में मदद करेगा। प्रशासन अब एक 'आंचलिक मास्टर प्लान' (Zonal Master Plan) तैयार करेगा ताकि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय निवासियों की आवश्यकताओं के बीच सही संतुलन बनाया जा सके।