नेशनल डेस्क, श्रेया पांडेय
पुणे: महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और शैक्षिक राजधानी पुणे से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सामाजिक और कानूनी विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। अक्सर हम सुनते हैं कि प्यार की राह में आने वाली बाधाओं को पार करने के लिए प्रेमी जोड़े वर्षों तक संघर्ष करते हैं, लेकिन पुणे के एक शिक्षित डॉक्टर जोड़े ने प्रेम विवाह के मात्र 24 घंटे के भीतर ही तलाक लेकर सबको चौंका दिया है। यह घटना न केवल आधुनिक रिश्तों की नाजुकता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कभी-कभी अत्यधिक समझदारी और आपसी सहमति भी रिश्तों को निभाने के लिए काफी नहीं होती।
जानकारी के अनुसार, यह जोड़ा पेशे से डॉक्टर है और पुणे के ही एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज से शिक्षा प्राप्त कर चुका है। दोनों के बीच पिछले कुछ वर्षों से प्रेम संबंध थे। वे एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे और उनके परिवारों को भी इस रिश्ते से कोई बड़ी आपत्ति नहीं थी। लंबी डेटिंग के बाद, उन्होंने अपने रिश्ते को आधिकारिक नाम देने का फैसला किया और धूमधाम से शादी की रस्में पूरी कीं। विवाह समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ, जिसमें दोनों पक्षों के दोस्त और करीबी रिश्तेदार शामिल हुए थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस मंडप में सात फेरे लिए गए हैं, वहीं अगले ही दिन अलगाव की इबारत लिखी जाएगी।
शादी की पहली रात और उसके बाद के कुछ घंटों में ही दोनों के बीच कुछ ऐसे वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आए, जिन्हें उन्होंने 'अपूरणीय' (Irreconcilable) माना। सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच किसी तीसरे व्यक्ति या दहेज जैसी कोई बात नहीं थी, बल्कि मामला पूरी तरह से व्यक्तिगत स्वभाव, भविष्य की योजनाओं और करियर की प्राथमिकताओं से जुड़ा था। दोनों ही डॉक्टर अत्यधिक महत्वाकांक्षी थे और विवाह के तुरंत बाद ही उन्हें अहसास हुआ कि उनकी जीवनशैली और पेशेवर प्रतिबद्धताएं एक-दूसरे के साथ मेल नहीं खा रही हैं।
आमतौर पर ऐसी स्थितियों में परिवार और मित्र सुलह की कोशिश करते हैं, लेकिन इस शिक्षित जोड़े ने भावनाओं में बहने के बजाय एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का फैसला किया। उनका मानना था कि गलत रिश्ते को सालों तक खींचने और बाद में कड़वाहट के साथ अलग होने से बेहतर है कि शुरुआत में ही इसे गरिमा के साथ समाप्त कर दिया जाए।
विवाह के 24 घंटे के भीतर ही दोनों ने आपसी सहमति से तलाक के लिए कानूनी परामर्श लिया। भारत के हिंदू विवाह अधिनियम के तहत सामान्यतः तलाक के लिए एक वर्ष का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में और आपसी सहमति के आधार पर त्वरित कानूनी रास्तों की तलाश की गई। इस घटना ने समाज में एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ कुछ लोग इसे रिश्तों के प्रति घटते धैर्य और समर्पण की कमी मान रहे हैं, वहीं युवाओं का एक वर्ग इसे 'साहसिक और व्यावहारिक' निर्णय बता रहा है, जो कड़वाहट भरी जिंदगी जीने के बजाय स्पष्टता को महत्व देता है।
यह मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और पेशेवर दबाव हमारे निजी रिश्तों पर भारी पड़ रहे हैं। पुणे की यह घटना एक सबक है कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो अलग-अलग जीवनशैलियों और प्राथमिकताओं का सामंजस्य है, जिसमें धैर्य और समझ की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।







