Ad Image
Ad Image

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

पुतिन की यात्रा से पहले भारत रूस सैन्य समझौते को मंजूरी संभव

विदेश डेस्क- ऋषि राज

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अगले महीने होने वाली बहुप्रतीक्षित भारत यात्रा से पहले रूस और भारत के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य समझौते को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। रूसी संसद के निचले सदन स्टेट डूमा में इस प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया है, जो दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की क्षमता रखता है।

पुतिन 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 4 से 5 दिसंबर के बीच भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आने वाले हैं। इस यात्रा को रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट पर बातचीत चल रही है।

लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट पर नई प्रगति

सूत्रों के अनुसार, यह समझौता सेनाओं के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सपोर्ट को मजबूत करेगा। इसके तहत दोनों देशों के सैन्य कर्मी, युद्धपोत और लड़ाकू विमान एक-दूसरे के ठिकानों और सैन्य स्थलों का उपयोग कर सकेंगे। यह सुविधा न केवल संयुक्त सैन्य अभियानों, प्रशिक्षण और अभ्यासों को आसान बनाएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मिशनों में सहयोग को भी बढ़ावा देगी।

इस समझौते पर 18 फरवरी को मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार और रूस के तकनीकी रक्षा उप मंत्री अलेक्सांडर फोमिन ने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, समझौते को औपचारिक रूप से लागू करने के लिए रूसी संसद की मंजूरी आवश्यक है, और अब स्टेट डूमा में इसके अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

रूस की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘तास’ के अनुसार, स्टेट डूमा ने इस समझौते को अनुमोदित करने के लिए प्रस्ताव पेश कर दिया है। प्रस्ताव में उल्लेख है कि दोनों देशों के बीच यह व्यवस्था सैन्य कर्मियों, युद्धपोतों और सैन्य विमानों की तैनाती से संबंधित लॉजिस्टिक्स को सरल बनाएगी।

समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रस्ताव पर विचार करते समय यह सुझाव भी दिया गया है कि रूसी सेना भारतीय ठिकानों पर और भारतीय सेना रूसी ठिकानों पर तैनाती, तकनीकी सहायता और रसद सहायता प्राप्त कर सकेगी। इससे समुद्री मार्ग में संचालित होने वाले रूसी युद्धपोतों तथा भारतीय नौसेना के जहाजों के बीच सहयोग आसान हो जाएगा।

रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा समझौता

यह समझौता भारत–रूस की ऐतिहासिक रणनीतिक साझेदारी में नई ऊर्जा भर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समझौते से भारत को उत्तरी समुद्री मार्ग, आर्कटिक क्षेत्र और रूसी पूर्वी बंदरगाहों तक सैन्य व लॉजिस्टिक्स पहुंच बढ़ेगी। वहीं, रूस को हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

प्रस्ताव के अनुसार, दोनों देशों की सेनाएँ संयुक्त सैन्य अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एक-दूसरे के ठिकानों का उपयोग कर सकेंगी। यह सहयोग रक्षा उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव डालने वाला है।

पुतिन की यात्रा से पहले बड़ा संकेत

पुतिन की आगामी भारत यात्रा से पहले रूसी संसद द्वारा इस सैन्य समझौते को मंजूरी दिया जाना एक बड़े कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यदि डूमा द्वारा इसे अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह समझौता भारत और रूस के बीच रक्षा संबंधों को और अधिक मजबूत और व्यापक बना देगा।