नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के लगभग एक महीने बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। हाल ही में नई दिल्ली में उनकी मुलाकात कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से हुई। दोनों पक्षों के सूत्रों ने इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से सामान्य बताया है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं।
चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर बिहार चुनाव में जन सुराज पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सुर्खियों में लौट आए हैं। सूत्रों के अनुसार, पीके और प्रियंका गांधी के बीच यह बैठक बंद कमरे में हुई, जो करीब दो घंटे तक चली। इस दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तर भारतीय राज्यों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हुई। इसी वजह से इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।
हालांकि, दोनों पक्षों ने इसे केवल शिष्टाचार भेंट बताया है और इसके राजनीतिक मायने कम करके दिखाने की कोशिश की है। इसके बावजूद यह मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में प्रशांत किशोर और कांग्रेस के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। वर्ष 2021 में जद (यू) से निष्कासित होने के एक साल बाद प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद 2022 में कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत शुरू हुई। अप्रैल 2022 में सोनिया गांधी के 10 जनपथ स्थित आवास पर पीके ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित शीर्ष नेतृत्व के सामने पीपीटी प्रेजेंटेशन दिया था।
तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके सुझावों पर विचार के लिए एक पैनल गठित किया था। इसके कुछ समय बाद कांग्रेस की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए ‘एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप’ बनाया गया और प्रशांत किशोर को इसमें शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया, क्योंकि वे केवल एक सदस्य के रूप में नहीं बल्कि अधिक अधिकार और स्वतंत्रता के साथ काम करना चाहते थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें जी-23 समूह के सदस्य भी शामिल थे, ने किसी बाहरी व्यक्ति के निर्देश पर संगठनात्मक बदलावों का विरोध किया और प्रशांत किशोर पर पूरा भरोसा नहीं जताया।
कांग्रेस ने उस समय बयान जारी कर कहा था कि प्रशांत किशोर के पीपीटी प्रेजेंटेशन और चर्चा के बाद उन्हें पार्टी में जिम्मेदारी के साथ शामिल होने का न्योता दिया गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। कांग्रेस ने उनके प्रयासों और सुझावों की सराहना भी की थी। वहीं, प्रशांत किशोर ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने कांग्रेस का प्रस्ताव ठुकरा दिया है, क्योंकि उनके अनुसार कांग्रेस को किसी एक व्यक्ति से ज्यादा मजबूत नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है, ताकि पार्टी की गहरी संरचनात्मक समस्याओं को दूर किया जा सके।
इसके बाद से प्रशांत किशोर लगातार कांग्रेस की आलोचना करते रहे हैं। बिहार चुनाव के दौरान उन्होंने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए ‘वोट चोरी’ और ‘मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) जैसे मुद्दों को महत्वहीन बताया था और कहा था कि बिहार में इनका कोई चुनावी असर नहीं होगा। चुनाव नतीजों में कांग्रेस 61 में से केवल 6 सीटें जीत पाई, जबकि जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। पार्टी के 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
इन्हीं पृष्ठभूमियों के बीच प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की हालिया मुलाकात ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।







