विदेश डेस्क, ऋषि राज
ढाका: बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक हिंसा ने हालात को गंभीर बना दिया है। कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पहले से तनावग्रस्त माहौल के बीच अब एक और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। इस बार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और खुलना डिविजनल हेड मोतालेब सिकदर को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। गोली उनके सिर में लगी है, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला सोमवार को उस समय हुआ जब मोतालेब सिकदर किसी कार्यक्रम से लौट रहे थे। अचानक घात लगाए बैठे हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी और मौके से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि गोली सिकदर के सिर के बाईं ओर लगी है।
फिलहाल उनका इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हमले के बाद इलाके में दहशत फैल गई और सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा की आग में झुलस रहा है। हाल ही में इंकलाब मंच के प्रवक्ता और कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद राजधानी ढाका समेत कई शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, मीडिया संस्थानों पर हमले हुए और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोतालेब सिकदर पर हमला उसी अस्थिर माहौल की कड़ी हो सकता है। सिकदर छात्र नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) से भी जुड़े रहे हैं और उनकी राजनीतिक सक्रियता के कारण वह पहले भी विवादों में रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला किसने और किस मकसद से किया।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव होने हैं। अंतरिम सरकार के गठन के बाद यह पहला आम चुनाव होगा, जिसे लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, देश के विभिन्न हिस्सों से हिंसक झड़पों, राजनीतिक हमलों और अल्पसंख्यकों—खासतौर पर हिंदू समुदाय—पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते हालात पर काबू नहीं पाया गया, तो चुनावी प्रक्रिया पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। सरकार पर कानून-व्यवस्था बहाल करने और राजनीतिक हिंसा रोकने का दबाव बढ़ता जा रहा है। वहीं, मोतालेब सिकदर पर हुए हमले ने बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर असुरक्षा और भय का माहौल पैदा कर दिया है।







