हेल्थ डेस्क, मुस्कान कुमारी
मुंबई। टाटा मेमोरियल सेंटर के शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजाना सिर्फ दो ग्राम बीयर से मुंह का कैंसर 59 प्रतिशत बढ़ जाता है। अध्ययन से साफ है कि शराब की कोई सुरक्षित मात्रा नहीं।
शराब और तंबाकू का संयुक्त सेवन भारत में मुंह के कैंसर के 62 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) की कैंसर महामारी विज्ञान इकाई के वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में पाया कि कम मात्रा में शराब पीने वाले लोगों में भी बुक्कल म्यूकोसा कैंसर का जोखिम काफी बढ़ जाता है। यह कैंसर भारत में स्तन कैंसर के बाद दूसरा सबसे आम मalignancy है, जिसमें हर साल 1,40,000 नए मामले और करीब 80,000 मौतें होती हैं।
कम शराब, बड़ा खतरा
अध्ययन में 1,803 कैंसर मरीजों और 1,903 स्वस्थ लोगों की आदतों का विश्लेषण किया गया। नतीजे चौंकाने वाले हैं: रोजाना एक गिलास से ज्यादा शराब पीने और तंबाकू चबाने वालों में कैंसर का जोखिम पांच गुना बढ़ जाता है। यहां तक कि बीयर से सिर्फ दो ग्राम एल्कोहल रोजाना पीने वालों में 59 प्रतिशत ज्यादा खतरा पाया गया। मजबूत ड्रिंक्स जैसे व्हिस्की या वोदका से नौ ग्राम (लगभग एक गिलास) एल्कोहल से भी जोखिम बढ़ता है।
शराब का सेवन कुल मिलाकर बुक्कल म्यूकोसा कैंसर का जोखिम 68 प्रतिशत बढ़ाता है। रेगुलेटेड ड्रिंक्स से 72 प्रतिशत और लोकल ब्रूड शराब से 87 प्रतिशत तक खतरा ज्यादा। बंगाल में पी जाने वाली 'बांगला' जैसी डिस्टिल्ड स्पिरिट में एथनॉल 60 प्रतिशत तक होता है, जबकि उत्तर भारत के 'ठर्रा' में 90 प्रतिशत। ये अनियमित शराबें और भी घातक साबित हो रही हैं।
तंबाकू के साथ 'एडिटिव' प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पाया कि तंबाकू चबाने से अकेले 200 प्रतिशत जोखिम बढ़ता है, शराब से 76 प्रतिशत, लेकिन दोनों साथ में 346 प्रतिशत। टीएमसी की मोलेक्यूलर एपिडेमियोलॉजी यूनिट की प्रमुख शरयू म्हात्रे ने कहा कि ज्यादा शराब पीने से जोखिम और बढ़ता है। एथनॉल मुंह की आंतरिक परत को बदल देता है, जिससे तंबाकू के कार्सिनोजेंस आसानी से घुस जाते हैं।
भारत में स्थानीय रूप से उन्नत बुक्कल म्यूकोसा कैंसर के 100 मरीजों में से 57 पांच साल के अंदर मर जाते हैं। यह उच्च मृत्यु दर रोकथाम की जरूरत पर जोर देती है। अध्ययन में बीयर, व्हिस्की, वोदका, रम, फ्लेवर्ड लो-एल्कोहल ड्रिंक्स और लोकल ब्रूड का विश्लेषण किया गया। एथनॉल की मात्रा बीयर में 5 प्रतिशत से लेकर ठर्रा में 90 प्रतिशत तक पाई गई।
जन जागरूकता की जरूरत
टीएमसी के कैंसर एपिडेमियोलॉजी सेंटर के निदेशक राजेश दीक्षित ने कहा कि मॉडरेट शराब और अनियमित लोकल ड्रिंक्स पर सख्ती बरतनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2023 में चेतावनी दी थी कि शराब की कोई सुरक्षित मात्रा नहीं। यूरोपीय क्षेत्र में आधे शराब से जुड़े कैंसर 'लाइट' या 'मॉडरेट' खपत से होते हैं।
अध्ययन बीएमजे ग्लोबल हेल्थ जर्नल में मंगलवार को प्रकाशित हुआ। यह भारत का पहला बड़ा अध्ययन है जो शराब और बुक्कल म्यूकोसा कैंसर के बीच संबंध की जांच करता है। शोध से साफ है कि रोकथाम के लिए शराब और तंबाकू पर जागरूकता बढ़ानी होगी।







