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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में तनातनी: ट्रंप प्रशासन ने माना, भारत दबाव में नहीं झुकता

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार एवं टैरिफ विवाद पर ट्रंप प्रशासन की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने स्वीकार किया है कि भारत किसी भी देश के दबाव में आकर निर्णय लेने वाला देश नहीं है और व्यापार वार्ता में उसका रुख काफी “अड़ियल” रहा है।
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच टैरिफ दरों, कृषि उत्पादों के बाजार में पहुंच, आईटी सेवाओं पर पाबंदियों, और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है।

भारत का अडिग रुख

स्कॉट बेसेन्ट ने एक अमेरिकी मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा – "भारत अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में थोड़ा अड़ियल रहा है। यह एक मुश्किल लक्ष्य है, लेकिन हम अभी भी अच्छे पोजिशन में हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल स्विट्जरलैंड और भारत के साथ बड़े व्यापारिक समझौते लंबित हैं, लेकिन भारत के साथ बातचीत चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे, जिसमें स्टील और एल्युमिनियम प्रमुख थे।
जवाब में, भारत ने भी अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर प्रतिशोधात्मक टैरिफ लगाए।

अमेरिका चाहता है कि भारत डिजिटल सेवाओं पर लगाए गए इक्वलाइजेशन लेवी को हटाए और अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए अधिक खुला बाजार दे।
भारत की मांग है कि अमेरिका जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेस (GSP) में भारत को फिर से शामिल करे और एच-1बी वीज़ा पर प्रतिबंधों को कम करे।

वार्ता की मौजूदा स्थिति

अमेरिकी वित्त मंत्री ने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और उनकी कानूनी टीम इन सौदों को अंतिम रूप देने में लगातार काम कर रही है। हालांकि, अभी भी कई बिंदुओं पर सहमति बनना बाकी है।

अमेरिकी बयान से यह साफ संकेत जाता है कि भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता पर किसी प्रकार का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है। मोदी सरकार ने बार-बार कहा है कि भारत का व्यापार नीति निर्णय केवल राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा, चाहे सामने अमेरिका जैसा आर्थिक महाशक्ति ही क्यों न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता जारी रहेगी, लेकिन किसी बड़े समझौते की संभावना तभी है जब दोनों पक्ष टैरिफ रियायतें और बाजार पहुंच जैसे संवेदनशील मुद्दों पर समझौता करें।