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भारत-पाक और इज़रायल-ईरान संघर्षों में भूमिका के लिए ट्रंप को नोबेल नामांकन, भारत ने खारिज की अमेरिकी मध्यस्थता

विदेश डेस्क, मुस्कान कुमारी |

भारत-पाक और इज़रायल-ईरान संघर्षों में भूमिका के लिए ट्रंप को नोबेल नामांकन, भारत ने खारिज की अमेरिकी मध्यस्थता
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। यह नामांकन भारत-पाकिस्तान और इज़रायल-ईरान संघर्षों में कथित मध्यस्थता के लिए हुआ है। पाकिस्तान और अमेरिकी सांसदों ने उनकी भूमिका को निर्णायक बताया है, वहीं भारत सरकार ने किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप से इनकार किया है।

नामांकन के पीछे के कारण
भारत-पाक संघर्ष: पाकिस्तान सरकार ने कहा कि मई 2025 में कश्मीर में हुए आतंकी हमले और भारत के जवाबी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उत्पन्न तनाव को ट्रंप ने शांत कराया। पाकिस्तान के अनुसार, ट्रंप की कूटनीति के चलते दोनों देशों के बीच युद्धविराम संभव हो सका।
लेकिन भारत ने इस दावे को खारिज कर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने स्पष्ट किया कि 10 मई को हुआ युद्धविराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संवाद का नतीजा था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी।
इज़रायल-ईरान युद्ध: 24 जून को अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद बडी कार्टर ने ट्रंप को इज़रायल-ईरान के बीच 12 दिन चले संघर्ष को समाप्त करने के लिए नामित किया। उनका दावा है कि ट्रंप ने रातों-रात युद्धविराम सुनिश्चित किया और ईरान की परमाणु योजनाओं पर नियंत्रण में भूमिका निभाई।
इस संघर्ष की शुरुआत इज़रायल द्वारा ईरान की प्रमुख परमाणु स्थलों—फोर्डो, नतांज़ और इस्फहान—पर किए गए हमलों से हुई थी, जिसके बाद रॉकेट हमलों का सिलसिला शुरू हो गया। अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद युद्धविराम घोषित किया गया।

प्रतिक्रियाएं और विरोधाभास
पाकिस्तान की सराहना: पाकिस्तानी प्रशासन ने ट्रंप को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया जिसने क्षेत्र में संभावित परमाणु युद्ध को रोका।
अमेरिकी समर्थन: सांसद बडी कार्टर ने ट्रंप की “शक्ति के जरिए शांति” नीति की तारीफ की और उन्हें ईरान को परमाणु हथियारों से रोकने वाला बताया।
भारत की असहमति: भारत ने स्पष्ट किया कि युद्धविराम पूरी तरह सैन्य स्तर की द्विपक्षीय बातचीत का परिणाम था।

विवाद और वैश्विक प्रतिक्रिया
पाकिस्तान में आलोचना: देश के भीतर कुछ राजनयिकों और पत्रकारों ने ट्रंप को नामांकित करने को अनुचित ठहराया, यह कहते हुए कि ट्रंप ने गाज़ा और ईरान पर आक्रामक रुख अपनाया, जो शांति के सिद्धांतों से मेल नहीं खाता।
यूक्रेनी सांसद की प्रतिक्रिया: ओलेक्सांद्र मेरेज़्को ने पहले ट्रंप को रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए नामित किया था लेकिन अब समर्थन वापस ले लिया। उनका आरोप है कि ट्रंप ने यूक्रेन को लेकर वादे पूरे नहीं किए।
युद्धविराम की स्थिति: विश्लेषकों के अनुसार इज़रायल-ईरान युद्धविराम अस्थायी हो सकता है, और परमाणु तनाव अभी भी बरकरार है।

पहले के नामांकन और नोबेल प्रक्रिया
ट्रंप को इससे पहले भी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया जा चुका है:

  • 2018: उत्तर कोरिया के साथ कूटनीति के लिए
  • 2020: अब्राहम समझौते के लिए
  • 2021: सर्बिया-कोसोवो वार्ता
  • 2025: वैश्विक शांति प्रयासों पर कैलिफोर्निया के सांसद द्वारा

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सरकारें, सांसद, और कुछ मान्य व्यक्तित्व नामांकन कर सकते हैं। 2025 में 338 नामांकन हुए हैं। नार्वे की नोबेल समिति अक्टूबर में विजेता की घोषणा करेगी।