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मोतिहारी: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लूटने वाले गिरोह का अंत

लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।

DYSP अभिनव पाराशर की टीम ने अंतरराज्यीय गिरोह कोदबोचा;मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी में छापेमारी कर तीन शातिर गिरफ्तार

पूर्वी चम्पारण: साइबर पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' और स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक खतरनाक अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। DYSP सह साइबर थानाध्यक्ष अभिनव पाराशर के नेतृत्व में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने अपराधियों के नेटवर्क को हिला कर रख दिया है। पुलिस ने भारी मात्रा में कैश, एटीएम कार्ड और मोबाइल के साथ गिरोह के तीन मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है।

ऐसे बिछाया गया जाल: एक बैंक खाते ने खोली पोल

इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब साइबर सेल की तकनीकी टीम ने एक संदिग्ध बैंक खाते (20100018589939) पर नज़र डाली। जांच में पता चला कि इस अकेले खाते के खिलाफ देश भर के अलग-अलग राज्यों में 10 गंभीर शिकायतें दर्ज थीं। ठग इस खाते का इस्तेमाल आईपीओ (IPO) आवंटन और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर वसूली गई रकम को खपाने के लिए कर रहे थे।

छापेमारी और बरामदगी: पुलिस को मिला साक्ष्यों का जखीरा

मधुबन के भरत प्रसाद से शुरू हुई कड़ी मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी तक जा पहुंची। पुलिस ने मुजफ्फरपुर से जितेन्द्र कुमार को उठाया, जिसकी निशानदेही पर सीतामढ़ी में दबिश देकर अमल प्रकाश और ओम प्रकाश को दबोच लिया गया।क्या-क्या हुआ बरामद?

  • नकद राशि: 1,20,000 (ठगी के रुपए)ATM कार्ड: 18 विभिन्न बैंकों के स्मार्टफोन: 05 अपराध में प्रयुक्त सिम कार्ड: 06
  • वाहन: 01 मोटरसाइकिल

मास्टरमाइंड का 'मोडस ऑपेरंडी'

यह गिरोह भोले-भाले लोगों को 'सिविल स्कोर' सुधारने का झांसा देकर उनके बैंक खाते और चेकबुक ले लेता था। बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल देशव्यापी साइबर ठगी के ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था। गिरोह के निशाने पर मुख्य रूप से शेयर बाजार में निवेश करने वाले और डिजिटल अरेस्ट के डर से सहमे लोग होते थे।

टीम को मिली शाबाशी

इस सफल अभियान में DYSP अभिनव पाराशर के साथ पु०अ०नि० शिगम सिंह, सौरभ कुमार आजाद, आनंद कुमार भारती, नीरज कुमार और महिला सिपाही पूजा कुमारी ने मुख्य भूमिका निभाई। पुलिस अब इन अपराधियों के विदेशी संपर्कों और अन्य गुप्त खातों की तलाश में जुटी है।

सावधान: साइबर थाना पुलिस ने अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ओटीपी या चेकबुक न दें और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कॉल आने पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें।