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मोतिहारी : 'विराट रामायण मंदिर' में होगी 'सहस्त्रलिंगम' की स्थापना

लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।

DM और SP ने तैयारियों का लिया जायजा; उमड़ेगा जनसैलाब, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

पूर्वी चंपारण: मोतिहारी जिले के  पावन धरती एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी आध्यात्मिक चमक बिखेरने के लिए तैयार है। कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया में निर्माणाधीन विश्व के सबसे बड़े 'विराट रामायण मंदिर' में आगामी 17 जनवरी को विशाल शिवलिंग (सहस्त्रलिंगम) की स्थापना होने जा रही है। इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन को लेकर जिले के प्रशासनिक अमले ने कमर कस ली है। सुरक्षा और विधि-व्यवस्था सर्वोपरि गुरुवार को जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से मंदिर परिसर का सघन दौरा किया। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की प्रगति और स्थापना समारोह की तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था और सुरक्षा मानकों में कोई चूक नहीं होनी चाहिए।

यह गौरव का क्षण है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल को तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं: सौरभ जोरवाल, जिलाधिकारी

भीड़ नियंत्रण और सुगम यातायात पर जोर

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने यातायात और पार्किंग की विशेष रणनीति तैयार की है; वाहनों के लिए अलग-अलग स्थल चिन्हित किए गए हैं, जहाँ सूचना के लिए बड़े 'फ्लेक्स' बोर्ड लगाए जाएंगे। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग और वॉलिंटियर्स की तैनाती सुनिश्चित की गई है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने मौके पर मौजूद आम नागरिकों से भी बात की और उनकी राय ली ताकि व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा सके।

लोगों में भारी उत्साह: भक्तिमय हुआ माहौल

विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना को लेकर न केवल चंपारण बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय लोग इसे एक उत्सव की तरह मना रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (चकिया), प्रखंड विकास पदाधिकारी (कल्याणपुर), थाना प्रभारी और प्रोजेक्ट इंजीनियर भी मौजूद रहे।
यह मंदिर न केवल एक धार्मिक केंद्र होगा, बल्कि यह अपनी भव्यता और वास्तुशिल्प के कारण पर्यटन का भी एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। 17 जनवरी का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा, जब सहस्त्रलिंगम की स्थापना के साथ ही जन-जन की आस्था को एक नई ऊंचाई मिलेगी।