लोकल डेस्क, एन के सिंह।
अब पंचायतों में 'साइबर कवच' तैयार कर रही जिला पुलिस।एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देशन में जिले से लेकर गांव तक चला जागरूकता अभियान।
पूर्वी चम्पारण: मोतिहारी जिले में साइबर अपराधियों की अब खैर नहीं है। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के कुशल मार्ग निर्देशन और साइबर थानाध्यक्ष सह पुलिस उपाधीक्षक (DSP) अभिनव पाराशर के नेतृत्व में जिला पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध एक निर्णायक जंग छेड़ दी है। एक तरफ जहां पुलिस तकनीकी कौशल से बड़े-बड़े साइबर गिरोहों का भंडाफोड़ कर अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज रही है, वहीं दूसरी ओर 'साइबर मुक्त समाज' बनाने के लिए गांव-गांव जाकर आम जनता को जागरूक किया जा रहा है।
सिसवा पंचायत भवन में उमड़ा जनसैलाब
इसी कड़ी में शुक्रवार को बंजरिया प्रखंड के सिसवा पूर्वी पंचायत सरकार भवन पर एक भव्य 'साइबर सुरक्षा जागरूकता समारोह' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। पुलिस उपाधीक्षक अभिनव पाराशर ने खुद कमान संभालते हुए लोगों को सरल भाषा में समझाया कि कैसे एक छोटी सी सावधानी उन्हें बड़ी ठगी से बचा सकती है।
साइबर सुरक्षा के सिखाए 'अचूक' मंत्र
समारोह के दौरान अभिनव पाराशर ने साइबर अपराध के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मुख्य रूप से इन विषयों पर ग्रामीणों को सजग किया ऑनलाइन फ्रॉड और सेफ्टी,अनजान लिंक पर क्लिक न करने और ओटीपी (OTP) साझा न करने की सलाह दी। सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के सुरक्षित उपयोग और प्राइवेसी सेटिंग्स के बारे में बताया कि महिला एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों और उनसे बचाव के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
भारतीय साइबर कानून: साइबर अपराध होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करने या पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई।
"हमारा लक्ष्य सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि जनता को इतना जागरूक बनाना है कि अपराधी उनके बैंक खातों तक पहुंच ही न सकें। साइबर थाना अब केवल कार्रवाई का केंद्र नहीं, बल्कि आमजन के लिए सुरक्षा का भरोसा बन चुका है।"
अभिनव पाराशर, DSP सह साइबर थानाध्यक्ष
एक के बाद एक बड़े खुलासे, अपराधी खौफ में
बता दें कि जब से मोतिहारी साइबर थाने की कमान अभिनव पाराशर ने संभाली है, तब से जिले में साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर जोरदार प्रहार हुआ है। पुलिस ने न केवल अंतरराज्यीय गिरोहों का पर्दाफाश किया है, बल्कि ठगी गई राशि को भी रिकवर करने में सफलता हासिल की है। अब इस अभियान को स्कूलों और पंचायतों तक ले जाकर पुलिस ने अपराधियों की कमर तोड़ दी है।
ग्रामीणों ने पुलिस की इस पहल की जमकर सराहना की। लोगों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रमों से उनमें पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है और वे अब तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।







