लोकल डेस्क, एन के सिंह।
अंतरजिला गिरोह के 3 शातिर गिरफ्तार, चोरी की जेसीबी को बेतिया से हाजीपुर में बदली जा रही थी पहचान। पुलिस टीम को 10,000 रुपये इनाम की घोषणा लोन पर ली गई मशीन चोरी होने से टूट चुका था मालिक, खाकी ने लौटाई चेहरे पर मुस्कान।
पूर्वी चंपारण: पुलिस ने एक बार फिर अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेरते हुए अंतरजिला वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। बंजरिया थाना क्षेत्र से चोरी हुई करीब 40 लाख रुपये की जेसीबी (JCB) को पुलिस ने न केवल बरामद कर लिया है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े तीन मुख्य तस्करों को भी दबोचा है। इस बड़ी सफलता पर पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कांड के उद्भेदन में शामिल पुलिस टीम और DIU को 10,000 रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
तकनीकी जाल में फंसा विकास, खुलते गए राज
इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत बंजरिया थाना कांड सं. 233/25 के तहत दर्ज प्राथमिकी के बाद हुई। 18 अप्रैल को बंजरिया के शेख बुद्धन स्कूल के पास से BR05GB5935 नंबर की जेसीबी चोरी हुई थी। सदर एसडीपीओ-1 दिलीप कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी अनुसंधान और डंप डाटा का सहारा लिया।
सबसे पहले विकास कुमार को अंबिका नगर से हिरासत में लिया गया। पुलिसिया पूछताछ में विकास ने कबूल किया कि उसने अपने साथी राहुल और 4-5 अन्य लोगों के साथ मिलकर जेसीबी चुराई थी और उसे बेतिया के दिनेश यादव के घर छिपा दिया था।
हाजीपुर में 'पंच' कर बदली जा रही थी पहचान
पुलिस जब बेतिया के दिनेश यादव के पास पहुंची, तो एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दिनेश ने बताया कि वह चोरी की गाड़ियां हाजीपुर के राजकुमार सिंह को बेच देता है। पुलिस ने जब राजकुमार को दबोचा, तो अंतरजिला सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ
मोडस ऑपरेंडी: राजकुमार सिंह नीलामी में पुरानी या 'एक्सीडेंटल' जेसीबी खरीदता था और फिर चोरी की गई नई मशीनों पर उन्हीं पुरानी मशीनों का चेचिस नंबर 'पंच' (Engine/Chassis Number Alteration) कर उन्हें बाजार में खपा देता था। बरामद जेसीबी को भी वह वैशाली के विदुपुर में बेचने की फिराक में खड़ा कर रखा था।
मालिक की आंखों में आए खुशी के आंसू
जेसीबी के मालिक ने यह मशीन करीब 40 लाख रुपये में लोन पर ली थी। चोरी होने के बाद उनका कारोबार पूरी तरह ठप हो गया था और ऊपर से बैंक की किश्तें भी चुकानी पड़ रही थीं। जेसीबी बरामद होने की खबर ने पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है।
गिरफ्तार अभियुक्तों में विकास कुमार (बेतिया) - चोरी की वारदात को अंजाम दिया। दिनेश कुमार यादव (बेतिया) - चोरी के वाहनों का रिसीवर (इसका पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है)।राजकुमार सिंह (वैशाली) - मास्टरमाइंड, जो चोरी की गाड़ियों की पहचान बदलकर बेचता था।
छापेमारी में सदर डीएसपी दिलीप कुमार, बंजरिया थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो, मुकेश कुमार, चंद्र प्रताप और जिला आसूचना इकाई (DIU) की टीम ने अहम भूमिका निभाई।







