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यमुना एक्सप्रेस-वे हादसा: 20 मिनट में तीन धमाके, 13 की मौत

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

मथुरा: यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे ने यात्रियों को दहला कर रख दिया। सुबह करीब चार बजे हुए इस हादसे में बस में आग लगने के बाद करीब 20 मिनट के भीतर तीन जोरदार धमाके हुए। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई यात्री घायल बताए जा रहे हैं। आग की लपटों से बचने के लिए यात्री शीशे तोड़कर खिड़कियों से कूदते नजर आए, जिससे मौके पर भगदड़ और दहशत का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से पहले एक्सप्रेस-वे पर माहौल पूरी तरह सामान्य था। अचानक जोरदार टक्कर और आग लगते ही चारों ओर चीख-पुकार मच गई। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे डर के मारे बस से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। आग और धुएं के कारण बस के अंदर हालात बेहद भयावह हो गए थे। यात्रियों का कहना है कि अगर कुछ मिनट और देर हो जाती, तो मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती थी।

हादसे के समय बस में सवार अयोध्या निवासी शालिनी मिश्रा ने बताया कि वह स्लीपर सीट पर सो रही थीं, तभी अचानक झटके से उनका सिर लोहे की रॉड से टकरा गया। कुछ पल के लिए उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और फिर चारों ओर चीखें सुनाई देने लगीं। बस का दरवाजा लॉक होने के कारण लोग शीशे तोड़कर बाहर निकलने लगे। धुएं से दम घुटने लगा था, जिसके बाद वह भी किसी तरह खिड़की से कूदकर बाहर आईं।

नोएडा के सूरज कुमार ने बताया कि आग की लपटें काफी ऊंची थीं और इस मंजर को देखकर उनका दिल दहल गया। वहीं हमीरपुर के रहने वाले रघुवीर ने बताया कि टक्कर के दौरान उनके पैर गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन चीख-पुकार के बीच उन्होंने भी बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

हादसे में एक एसी स्लीपर बस का पिछला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आग लगने के बाद पीछे बैठे एक व्यक्ति और एक बच्चे के जिंदा जलने की आशंका जताई गई है, जिनकी मौत की पुष्टि के बाद मृतकों की संख्या 13 तक पहुंच गई। आग बुझने के बाद पुलिस ने बस में फंसे अवशेषों को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे और राहत व बचाव कार्य में जुट गए। ग्रामीणों ने बसों के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। वहीं रोडवेज बसों में इमरजेंसी गेट होने के कारण यात्री अपेक्षाकृत सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि एसी बसों में एक ही दरवाजा होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।