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यूक्रेन–फ्रांस राफेल समझौता सिर्फ घोषणा, खरीद-बिक्री नहीं

विदेश डेस्क- ऋषि राज

यूक्रेन और फ्रांस के बीच बहु-उद्देश्यीय राफेल लड़ाकू विमानों तथा एसएएमपी-टी (SAMP/T) वायु रक्षा प्रणालियों की संभावित आपूर्ति को लेकर हाल ही में सामने आए दस्तावेजों को लेकर बड़ी स्पष्टता सामने आई है। यूरोपीय राजनयिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच यह कोई “खरीद-बिक्री समझौता” नहीं है, बल्कि केवल इरादे की घोषणा  है, जिसे किसी भी प्रकार की आधिकारिक डील का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

सूत्रों ने बताया कि 17 नवंबर को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की फ्रांस यात्रा के दौरान जिस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए गए, वह महज़ एक राजनीतिक स्तर का इरादा-पत्र था। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह अटकलें चल रही थीं कि यूक्रेन ने फ्रांस से 100 राफेल लड़ाकू विमान और एसएएमपी-टी एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का औपचारिक समझौता किया है। हालांकि, अब यह साफ हो गया है कि ज़ेलेंस्की सरकार के पास फ्रांस के साथ किसी भी सैन्य खरीद समझौते को अंतिम रूप देने का अधिकार इस यात्रा के दौरान नहीं था।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यह घोषणा केवल दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने के व्यापक राजनीतिक इरादे को दर्शाती है, लेकिन इसमें किसी भी आर्थिक, तकनीकी या कानूनी प्रतिबद्धता को शामिल नहीं किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “इरादे की घोषणा किसी भी रूप में यह सिद्ध नहीं करती कि यूक्रेन तुरंत राफेल विमानों या वायु रक्षा प्रणालियों की खरीद करने जा रहा है। वास्तविक सौदा तब माना जाएगा जब दोनों देश औपचारिक रक्षा अनुबंध पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसमें तकनीकी विवरण, कीमत, संख्या और डिलीवरी टाइमलाइन तय होती है।”

फ्रांस और यूक्रेन के बीच रक्षा सहयोग पर चर्चा रूस–यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ी है। यूक्रेन अपने वायु रक्षा सिस्टम को मजबूत करने के लिए लगातार यूरोपीय देशों के साथ नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। फ्रांस ने भी कई मौकों पर यूक्रेन को सैन्य और मानवीय सहायता प्रदान की है और भविष्य में सहयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया है। हालांकि, राफेल जैसे हाई–एंड लड़ाकू विमानों की खरीद पर किसी डील की संभावना अभी दूर की मानी जा रही है, क्योंकि इसके लिए भारी वित्तीय संसाधनों और जटिल तकनीकी समझौतों की आवश्यकता होती है।

यूक्रेन के रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने भी संकेत दिया है कि देश प्राथमिक रूप से लड़ाकू ड्रोन, मिसाइल रक्षा कवच और तत्काल युद्ध आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उपकरणों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। राफेल विमानों पर इरादे की घोषणा यूक्रेन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह फिलहाल न तो बजट में शामिल है, न ही किसी सक्रिय प्रक्रिया में। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय की ओर से इस घोषणा पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन अधिकारियों ने यह जरूर स्पष्ट किया है कि राफेल जैसे उच्चस्तरीय हथियारों की आपूर्ति पर किसी भी बातचीत को औपचारिक रूप देने में कई चरणों की तकनीकी वार्ताएँ शामिल होंगी।

कुल मिलाकर, राफेल और एसएएमपी-टी प्रणालियों को लेकर यूक्रेन–फ्रांस के बीच हुए हस्ताक्षर केवल सहयोग बढ़ाने के शुरुआती इरादे की पुष्टि करते हैं। किसी भी वास्तविक समझौते के लिए अभी लंबी प्रक्रिया और विस्तृत बातचीत की जरूरत होगी।