विदेश डेस्क, ऋषि राज |
यूनान में किसानों ने सरकार की कृषि नीतियों और भुगतान प्रणाली में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। बढ़ती उत्पादन लागत, फसलों पर मिलने वाले कम दाम और भुगतान में देरी के विरोध में किसानों ने सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे देशभर में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
किसानों के प्रतिनिधियों का कहना है कि ईंधन महंगा होने, उर्वरक और कृषि सामग्री की कीमतों में वृद्धि तथा बाजार में फसलों का उचित मूल्य न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इसके अलावा, सरकार द्वारा समय पर सब्सिडी और सहायता राशि जारी न किए जाने से किसानों में नाराज़गी बढ़ गई है।
सब्सिडी घोटाले ने बढ़ाया गुस्सा
यह व्यापक प्रदर्शन हाल ही में उजागर हुए एक बड़े सब्सिडी धोखाधड़ी मामले के बाद और तीव्र हो गया है। पिछले सप्ताह हुए इस घोटाले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच में यह सामने आया कि सरकारी संस्था OPEKEPE ने नकली या फर्जी किसानों के नाम पर अवैध सब्सिडी के रूप में लाखों यूरो का भुगतान किया था।
किसानों का आरोप है कि जबकि वास्तविक किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, वहीं फर्जी और नकली खातों को भारी-भरकम सब्सिडी दी जा रही है। इस मामले ने किसानों के रोष को और भड़काया है और पूरे देश में सब्सिडी भुगतान प्रणाली की अतिरिक्त जांच शुरू हो गई है।
प्रदर्शन से यातायात प्रभावित
किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्गों; जो देश में माल ढुलाई और दैनिक आवागमन के प्रमुख मार्ग हैं—को ट्रैक्टरों और वाहनों से अवरुद्ध कर दिया, जिससे कई घंटों तक भारी जाम की स्थिति बनी रही। यात्रियों और परिवहन सेवाओं को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ा।
सरकार ने प्रदर्शन कर रहे किसानों से बातचीत की अपील की है और कहा है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। कृषि मंत्रालय ने सब्सिडी घोटाले की गहन जांच का आश्वासन दिया है तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई का वादा किया है।
किसानों की मांगें
प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांगें निम्न हैं:
- बढ़ती लागत को देखते हुए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए
- ईंधन और कृषि सामग्री पर राहत दी जाए
- सब्सिडी भुगतान को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए
- फर्जी किसानों को सब्सिडी देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा और भविष्य में प्रदर्शन और उग्र हो सकता है।







