लोकल डेस्क, नीतीश कुमार।
मोतिहारी: मोतिहारी में बढ़ती ठंड के बीच नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा की जा रही अलाव व्यवस्था की तैयारियों की जमीनी हकीकत सामने आई है। दैनिक भास्कर की टीम ने रात 9 बजे से 12 बजे तक शहर के प्रमुख चौराहों पर रियलिटी चेक किया, जिसमें प्रशासनिक दावों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला।
दैनिक भास्कर की टीम ने शहर के उन सात प्रमुख स्थानों का जायजा लिया, जहां हर साल नियमित रूप से नगर निगम की ओर से अलाव की व्यवस्था की जाती रही है। लेकिन इन सात स्थानों में से केवल एक जगह ही निगम द्वारा जलता हुआ अलाव मिला। बाकी स्थानों पर लोग या तो खुद आग की व्यवस्था करते नजर आए या फिर ठंड में बिना किसी सहारे के रात गुजारने को मजबूर दिखे।
4-5 लकड़ियां डालकर लौट जाती है निगम की गाड़ी
दैनिक भास्कर की टीम ने रियलिटी चेक की शुरुआत कचहरी चौक से की गई। यहां सब्जी बेचने वाली वृद्ध महिला गायत्री देवी मिलीं, जिनका ठेला ही उनका सहारा है। उन्होंने बताया कि नगर निगम की गाड़ी शाम के समय आती है और सिर्फ चार-पांच लकड़ियां डालकर चली जाती है, जो आधे घंटे में ही खत्म हो जाती हैं। उनका कहना था कि इतनी ठंड में अगर लोग खुद से आग की व्यवस्था न करें, तो हालात बेहद मुश्किल हो जाते हैं।
कूड़ा-कचरा जलाकर ठंड से बचाव
इसके बाद दैनिक भास्कर की टीम बलुआ चौक पहुंची, जहां टेम्पो चालक, यात्री और राहगीर कूड़ा-कचरा इकट्ठा कर आग जलाते नजर आए। लोगों ने बताया कि पहले हर साल निगम की ओर से लकड़ी डाली जाती थी, लेकिन इस बार न तो पर्याप्त लकड़ी मिल रही है और न ही कंबल बांटे जा रहे हैं।
स्थानीय दुकानदार मोहन जी ने बताया कि दो दिन पहले कुछ लकड़ियां डाली गई थीं, जो जल्दी ही खत्म हो गईं। पिछले चार-पांच दिनों से कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को खुद लकड़ी खरीदनी पड़ रही है या कूड़ा जलाकर ठंड से बचना पड़ रहा है।
कागजों तक सीमित निगम के दावे
दैनिक भास्कर की टीम जब सदर अस्पताल पहुंची तो गेट के पास चाय की दुकान के आसपास बड़ी संख्या में लोग ठंड से बचने के लिए जमा मिले। अलाव व्यवस्था को लेकर पूछने पर लोगों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि नगर निगम सिर्फ कागजों में ही दावे करता है। पहले यहां बड़ी मात्रा में लकड़ी डाली जाती थी, जिससे मरीजों के परिजन रात काट लेते थे। इस बार कई दिनों बाद महज चार-पांच किलो लकड़ी रखी गई, जो थोड़ी देर में ही खत्म हो गई। नतीजतन, मरीजों के परिजन खुले आसमान के नीचे ठंड झेलने को मजबूर हैं।
दुकानदारों ने खुद संभाली जिम्मेदारी
इसके बाद दैनिक भास्कर की टीम बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन पहुंची। स्टेशन के बाहर अंडा दुकानदार अमित कुमार ने बताया कि दुकान के पास जल रही आग उनकी खुद की व्यवस्था है। इस साल नगर निगम की ओर से कहीं भी समुचित अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। यात्रियों और दुकानदारों को अपनी जेब से खर्च कर ठंड से बचाव करना पड़ रहा है।
जानपुल चौक पर उमा शंकर प्रसाद अपनी दुकान के सामने कुछ लोगों के साथ आग तापते मिले। उन्होंने बताया कि उसी दिन निगम की ओर से कुछ लकड़ियां डाली गई थीं, जिनसे आग जलाई गई है, लेकिन यह व्यवस्था अस्थायी और नाकाफी है।
कंबल के इंतजार में रिक्शा चालक
मीना बाजार में आग बुझ चुकी थी। रिक्शा चालक अपनी रिक्शा पर पतली चादर ओढ़े बैठे मिले। उन्होंने बताया कि अब तक न तो नगर निगम और न ही जिला प्रशासन की ओर से कंबल मिला है और न ही ठंड से राहत के लिए कोई व्यवस्था की गई है।
रियलिटी चेक के दौरान नगर थाना की गश्ती गाड़ियां कई जगह नजर आईं। पुलिसकर्मियों ने देर रात घूमने को लेकर दैनिक भास्कर की टीम से पूछताछ की, लेकिन अलाव या कंबल वितरण की कोई व्यवस्था कहीं दिखाई नहीं दी।
छतौनी चौक पर एक दिन भी नहीं जला अलाव
रियलिटी चेक का आखिरी पड़ाव छतौनी चौक रहा, जहां पटना, दिल्ली सहित कई शहरों से बसें आकर रुकती हैं। यहां भी अलाव की कोई व्यवस्था नहीं मिली। यात्रियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि इस सर्दी में अब तक एक दिन भी नगर निगम की ओर से यहां अलाव नहीं जलाया गया है।
पड़ताल श्रेय - दैनिक भास्कर







