विदेश डेस्क, ऋषि राज
मास्को: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने रविवार को दावा किया कि उसकी सेना के स्टेनेर बैटलग्रुप ने यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में स्थित रोवनोये बस्ती पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब पूर्वी मोर्चों पर दोनों देशों के बीच लड़ाई लगातार तीव्र हो रही है।
रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि स्टेनेर बैटलग्रुप ने रोवनोये बस्ती में यूक्रेनी सैनिकों के खिलाफ जोरदार सैन्य कार्रवाई की। मंत्रालय ने बताया कि यह बस्ती डोनेट्स्क पीपल्स रिपब्लिक (DPR) में महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र मानी जाती है और इस पर कब्जे के बाद रूसी सेना अब आस-पास के इलाकों को भी यूक्रेनी उपस्थिति से मुक्त कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि शनिवार को विभिन्न मोर्चों पर चलाए गए सैन्य अभियानों में रूसी बलों ने 480 यूक्रेनी सैनिकों को मार गिराया। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो सकी है। रिपोर्ट के अनुसार, रूसी सेना ने इस क्षेत्र में एक और गांव को भी घेर लिया है, जिसके बाद वह भी जल्द नियंत्रण में लेने का दावा कर रही है।
स्टेनेर बैटलग्रुप ने यह भी कहा कि उसने रोवनोये बस्ती की "इकाईकरण प्रक्रिया" पूरी कर ली है, जिसका अर्थ है कि बस्ती में मौजूद यूक्रेनी सैन्य ढांचे को निष्क्रिय कर दिया गया है। रूसी अधिकारी इस नियंत्रण को पूर्वी मोर्चे पर अपनी बड़ी रणनीतिक सफलता बता रहे हैं।
यूक्रेन की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यूक्रेनी सेना आमतौर पर ऐसे रूसी दावों को प्रचार बताते हुए खारिज करती रही है। हालांकि, पिछले कुछ सप्ताहों में डोनेट्स्क क्षेत्र में रूस ने कई इलाकों में बढ़त बनाने के दावे किए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि युद्धक्षेत्र पर स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है।
रोवनोये बस्ती पर कथित कब्जे ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र रूस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से वह यूक्रेन के अन्य मोर्चों पर सैन्य दबाव बढ़ा सकता है। वहीं, यूक्रेनी सेना भी अपने खोए हुए इलाकों को दुबारा हासिल करने के लिए लगातार जवाबी हमले कर रही है।
पूर्वी यूक्रेन में यह युद्ध अभी थमने के कोई संकेत नहीं दिखा रहा है। दोनों ओर से दावे और प्रतिदावे तेज़ होते जा रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम की अपीलें अभी तक बेअसर साबित हो रही हैं।







