विदेश डेस्क, ऋषि राज |
रूस ने काला सागर में हाल ही में दो तेल टैंकरों और एक बंदरगाह पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि ये हमले न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के विरुद्ध हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अस्थिर करने की कोशिश भी हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की खुफिया सेवाओं ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है, जो सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता पैदा करता है।
ज़खारोवा ने बताया कि गास्प्रॉम के झंडे वाले रूसी तेल टैंकर नोवोरोसिस्क बंदरगाह से गुजर रहे थे जब उन पर हमला किया गया। यह घटना उस समय हुई जब टैंकर नियमित रूप से अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रहे थे। हमला मानव रहित नौकाओं (ड्रोन बोट्स) की मदद से किया गया, जिन्हें यूक्रेन पहले भी कई सैन्य अभियानों में उपयोग करता रहा है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य रूसी ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुँचाना और काला सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ाना है। बयान में यह भी कहा गया कि यूक्रेन की खुफिया सेवाओं द्वारा किए जा रहे ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के गंभीर उल्लंघन हैं और इनके कारण नागरिक जहाज़ों व चालक दल की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है।
रूस का कहना है कि काला सागर में इस तरह की गतिविधियों से वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है, जिससे दुनिया भर के ऊर्जा बाजार पर नकारात्मक असर पड़ना संभावित है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह यूक्रेन को ऐसी “उकसाने वाली कार्रवाइयों” से रोकने के लिए उचित कदम उठाए।
इस बीच, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि काला सागर में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के कारण यह क्षेत्र अब संघर्ष का नया केंद्र बनता जा रहा है। यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष पहले से ही कई मोर्चों पर जारी है, और समुद्री मार्गों पर बढ़ती झड़पें स्थिति को और जटिल बना रही हैं।
रूस ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे हमले जारी रहे, तो वह अपनी समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए और कड़े कदम उठाएगा। वर्तमान घटनाक्रम ने काला सागर में सुरक्षा व्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।







