नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली: देश में डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के बीच रेबीज वैक्सीन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई है। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए भारत के बाजार में नकली रेबीज वैक्सीन के संभावित बैच होने की आशंका जताई है। हालांकि भारतीय अधिकारियों और वैक्सीन निर्माता कंपनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
दरअसल, आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और रेबीज से मौत की खबरें भी सामने आ रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में ऑस्ट्रेलिया के हेल्थ डिपार्टमेंट ने दावा किया कि नवंबर 2023 के बाद भारत में रेबीज की एक वैक्सीन के नकली बैच बाजार में पाए गए थे। ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि अभयरब वैक्सीन के कुछ बैच संदिग्ध हो सकते हैं और ऐसे लोगों को अतिरिक्त डोज लेने की सलाह दी गई है।
ऑस्ट्रेलिया के अलावा अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने भी इस साल एक मामले का हवाला देते हुए भारत में नकली अभयरब वैक्सीन की आशंका जताई थी। वहीं ब्रिटेन के हेल्थ डिपार्टमेंट ने भी भारत से लौटे यात्रियों के लिए सतर्कता जारी की है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने नवंबर 2023 के बाद जानवर के काटने पर वैक्सीन ली थी।
अभयरब वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने विदेशी एजेंसियों के दावों को गलत बताया है। कंपनी के अनुसार, नकली वैक्सीन के कुछ बैच सामने आए थे, जिन्हें समय रहते पहचान कर दिल्ली, मुंबई, आगरा, लखनऊ, कानपुर और पटना सहित कई शहरों से जब्त कर लिया गया था। फिलहाल बाजार में कोई नकली बैच मौजूद नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में रेबीज के कई प्रभावी टीके उपलब्ध हैं और अभयरब उनमें से सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला टीका है। देश के करीब 40 प्रतिशत बाजार में इसकी हिस्सेदारी है।
एसोसिएशन फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ रेबीज इन इंडिया के अनुसार, रेबीज के इलाज में आमतौर पर पांच डोज दिए जाते हैं। अगर किसी एक डोज को लेकर संदेह भी हो, तो बाकी डोज और इम्युनोग्लोब्युलिन सही तरीके से दिए जाने पर मरीज सुरक्षित रहता है।
विशेषज्ञों ने साफ किया है कि पहले सामने आए कुछ मामलों में वैक्सीन फेल नहीं हुई थी, बल्कि घाव को ठीक से न धोना और इम्युनोग्लोब्युलिन न देना मौत की वजह बना। ऐसे में डॉग बाइट के बाद समय पर और पूरा इलाज कराना बेहद जरूरी है।







