लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।
फर्जी पासपोर्ट और हाईटेक उपकरण बरामद। साइबर डीएसपी अभिनव पाराशर के नेतृत्व में हुई सटीक कार्रवाई।
पूर्वी चम्पारण: विदेश में बेहतर भविष्य और मोटी कमाई का सपना दिखाकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह पर मोतिहारी साइबर पुलिस ने करारा प्रहार किया है। साइबर थाना की विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दबिश देकर इस अंतर्राज्यीय ठग गिरोह के मास्टरमाइंड सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जगी है, बल्कि ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त संदेश भी गया है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह खुद को विदेशी जॉब कंसल्टेंसी के रूप में पेश करता था। पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए बाकायदा लिखित एग्रीमेंट कराए जाते थे, ताकि सब कुछ कानूनी और असली लगे। हरपुर थाना क्षेत्र के उचीडीह निवासी अरशद अली से विदेश भेजने के नाम पर 21 लाख 75 हजार रुपये की ठगी की गई थी। जब लंबे समय तक न तो नौकरी मिली और न ही पैसे लौटाए गए, तब पीड़ित ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद साइबर डीएसपी अभिनव पाराशर के नेतृत्व में तकनीकी जांच शुरू की गई। कॉल डिटेल, डिजिटल ट्रांजेक्शन और लोकेशन एनालिसिस के जरिए पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि ठगी का संचालन लखनऊ से किया जा रहा है। इसके बाद एक विशेष टीम गठित कर कुर्सी रोड स्थित एक पॉश अपार्टमेंट में छापेमारी की गई, जहां से मुख्य आरोपी सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री हाथ लगी। बरामद सामानों में दो दर्जन से अधिक पासपोर्ट शामिल हैं, जिनमें भारतीय और बांग्लादेशी मूल के कई फर्जी दस्तावेज पाए गए। इसके अलावा सौ से अधिक एग्रीमेंट पेपर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, स्कैनर और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन से जुड़ी मशीनें भी जब्त की गई हैं। पुलिस का मानना है कि यह बरामदगी गिरोह के बड़े नेटवर्क और संगठित अपराध की पुष्टि करती है।
जांच में सामने आया है कि गिरोह खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने का लालच देकर युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। फर्जी पासपोर्ट और वीजा के दस्तावेज दिखाकर उनसे मोटी रकम वसूल ली जाती थी। जैसे ही पैसे मिल जाते, आरोपी अपना ठिकाना और संपर्क नंबर बदल लेते थे, जिससे पीड़ित असहाय हो जाते थे।
इस पूरे अभियान में साइबर थाना अध्यक्ष सह डीएसपी अभिनव पाराशर के साथ पुलिस निरीक्षक मनीष कुमार, मुमताज आलम और अन्य पुलिसकर्मियों की अहम भूमिका रही। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और उनके अंतर्राज्यीय नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
साइबर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि विदेश भेजने के नाम पर किसी भी अनधिकृत एजेंट या संस्था को पैसे न दें। नौकरी, वीजा या पासपोर्ट से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।







