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'वीज़ा टूरिस्ट' की संदिग्ध यात्रा: यूएई नागरिक भारतीय दलाल के साथ नेपाल सीमा पर रंगे हाथों गिरफ्तार

लोकल डेस्क, एन के सिंह।
 

पूर्वी चम्पारण: मोतिहारी शनिवार देर शाम रक्सौल सेक्टर में भारत-नेपाल सीमा पर तब हड़कंप मच गया, जब सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और नेपाली सशस्त्र बल (एनएएफ) के संयुक्त गश्ती दल ने एक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के नागरिक और उसके भारतीय सहयोगी को अवैध रूप से सीमा पार करने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी 'वीज़ा टूरिस्ट' बनकर आए विदेशी नागरिकों की संदिग्ध गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अवैध प्रवेश का प्रयास क्यों?
यूएई के अबू धाबी निवासी 34 वर्षीय सलीम अब्दुल्ला खल्फान अलशमशी, जिसके पास वैध यूएई पासपोर्ट (AA 0498168) था, 8 मार्च 2025 को भारत आया था और उसका पर्यटक वीज़ा 29 अगस्त 2025 तक वैध था।
पूछताछ में उसने दावा किया कि वह पर्यटन और नए व्यावसायिक अवसरों की तलाश में अक्सर भारत आता है। उसने बताया कि रक्सौल के एक होटल में रहते हुए उसे एक स्थानीय भारतीय व्यक्ति मिला, जिसने सीमा संबंधी सभी औपचारिकताएँ पूरी करने का वादा करते हुए उसे नेपाल ले जाने की पेशकश की।
एसएसबी की 47वीं बटालियन के कंपनी कमांडर रंजीत मिश्रा ने पुष्टि की कि विदेशी नागरिक को भारतीय दलाल के साथ पकड़ा गया, जो उसे अवैध तरीके से नेपाल में प्रवेश कराने की कोशिश कर रहा था।

मुंबई से गोरखपुर होते हुए रक्सौल

जाँच से पता चला है कि अलशम्शी अपने साथी के साथ मुंबई से गोरखपुर होते हुए रक्सौल पहुँचा था। यह रूट बताता है कि पकड़े गए विदेशी नागरिक का इरादा नेपाल में कानूनी इमिग्रेशन चेकपॉइंट को दरकिनार करना था।
गिरफ्तारी के बाद, दोनों आरोपियों को रक्सौल में आव्रजन अधिकारी को सौंप दिया गया। रविवार को उन्हें आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया गया। रक्सौल थाने के प्रभारी अभिषेक कुमार ने बताया कि अलशम्शी के खिलाफ विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सीमा पर बढ़ी संदिग्ध गतिविधियां

आव्रजन सूत्रों ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा जारी किया है। पिछले चार महीनों में, रक्सौल सीमा पर चीन, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य देशों के कुल 11 विदेशियों को भारत या नेपाल में अवैध रूप से घुसने की कोशिश में गिरफ्तार किया जा चुका है। यह घटना भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय अंतर्राष्ट्रीय मानव तस्करी या दलाल रैकेट की ओर इशारा करती है, जिसका खुलासा जांच एजेंसियों द्वारा किया जा सकता है।