Ad Image
Ad Image

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

सत्ता और विपक्ष की जंग: दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आगाज़

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा का बहुप्रतीक्षित शीतकालीन सत्र आज, सोमवार से पुराने सचिवालय स्थित विधानसभा सदन में शुरू हो गया। वर्ष 2026 की यह पहली विधायी बैठक है, जिसकी शुरुआत उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के अभिभाषण के साथ हुई। यह सत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह न केवल दिल्ली की प्रशासनिक जवाबदेही तय करेगा, बल्कि आगामी महीनों की राजनीतिक दिशा भी निर्धारित करेगा। स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने सत्र की शुरुआत से पहले सदन की गरिमा बनाए रखने और सार्थक चर्चा करने की अपील की है, हालांकि विपक्ष के तेवरों को देखते हुए सदन के काफी हंगामेदार रहने की संभावना है।

सीएजी रिपोर्ट और 'शीश महल' का मुद्दा इस सत्र का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वे तीन रिपोर्टें हैं, जिन्हें वर्तमान सरकार सदन पटल पर रखने जा रही है। इन रिपोर्टों में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास (जिसे भाजपा द्वारा 'शीश महल' नाम दिया गया है) के पुनर्निर्माण में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं का ब्यौरा शामिल है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली जल बोर्ड के कामकाज और दिल्ली सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के फंड आवंटन में हुए भ्रष्टाचार पर भी ऑडिट रिपोर्ट पेश की जाएगी। सत्ता पक्ष का आरोप है कि पिछले 11 वर्षों के शासन में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक चूक हुई है, जबकि आम आदमी पार्टी इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है।

प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बहस सदन में दिल्ली की दमघोंटू हवा और बढ़ते वायु प्रदूषण के संकट पर भी विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार प्रदूषण के मूल कारणों और पिछले वर्षों में उठाए गए कदमों की समीक्षा पर एक प्रस्ताव लाने वाली है। सदन में इस बात पर बहस होगी कि पराली जलाने, वाहनों के उत्सर्जन और धूल नियंत्रण के लिए जो फंड आवंटित किए गए थे, उनका सही उपयोग हुआ या नहीं। वहीं, विपक्ष (AAP) ने भी पलटवार की तैयारी की है और वह वर्तमान सरकार के पिछले 11 महीनों के कामकाज का हिसाब मांगेगी।

तकनीकी बदलाव और डिजिटल विधानसभा इस सत्र की एक और खास बात इसकी 'पेपरलेस' कार्यप्रणाली है। दिल्ली विधानसभा अब पूरी तरह से डिजिटल हो गई है। सभी विधायकों की मेज पर आईपैड लगाए गए हैं और कार्यवाही के लिए 'नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन' (NeVA) का उपयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विधायी कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाना है। सत्र के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और परिवहन जैसे प्रमुख विभागों से संबंधित सवालों के जवाब भी दिए जाएंगे। कुल मिलाकर, अगले चार दिन दिल्ली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस के गवाह बनेंगे।