हेल्थ डेस्क, मुस्कान कुमारी |
नोएडा: ठंडी हवाओं के बीच हृदय रोग का खतरा दोगुना हो जाता है, जहां सूक्ष्म लक्षणों को नजरअंदाज करने से जानलेवा दौरा पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये पांच संकेत समय रहते पहचानें तो जिंदगी बचाई जा सकती है।
सर्दियों का मौसम न केवल ठंडक लाता है, बल्कि दिल की धड़कनों को भी असंतुलित कर देता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जैसे अध्ययनों से साबित है कि ठंड से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर चढ़ता है और हार्ट अटैक का जोखिम 30 फीसदी तक बढ़ जाता है। नोएडा जैसे शहरी इलाकों में व्यस्त जीवनशैली इसे और खतरनाक बना देती है। यहां पांच ऐसे सूक्ष्म लक्षण हैं, जो अक्सर गैस या मौसमी थकान समझकर अनदेखे रह जाते हैं।
छाती में हल्की जकड़न: दौरा का पहला अलार्म
कई लोग इसे पेट की गैस या मांसपेशियों की खिंचाव बताकर टाल देते हैं, लेकिन सर्दी में यह हृदय की चेतावनी हो सकती है। ठंड से धमनियां संकुचित होने पर रक्त प्रवाह बाधित होता है, जिससे छाती में दबाव या जलन महसूस होती है। अगर यह दर्द 5-10 मिनट से ज्यादा रहे या हल्की सैर के दौरान हो, तो तत्काल डॉक्टर के पास पहुंचें। विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं और बुजुर्गों में यह लक्षण ज्यादा छिपा रहता है, जो साइलेंट हार्ट अटैक की ओर इशारा करता है।
बिना वजह थकान: हृदय की चुप्पी चीख
सुबह उठते ही कमजोरी या हल्के काम से ही हांफना? सर्दी में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन वास्तव में हृदय पर्याप्त ऑक्सीजन पंप न कर पाने का संकेत है। कोल्ड वेदर से शरीर की मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ जाती है, जो पहले से कमजोर दिल पर बोझ डालता है। एक हालिया अध्ययन बताता है कि 40 फीसदी हार्ट पेशेंट्स को दौरा पड़ने से पहले ऐसी थकान का सामना करना पड़ता है। अगर यह दो-तीन दिनों से ज्यादा रहे, तो ब्लड टेस्ट और ईसीजी करवाना जरूरी।
सांस फूलना: ठंड की सांस या हार्ट फेलियर?
ठंडी हवा में सांस लेना मुश्किल लगे, तो इसे जुकाम न समझें। हृदय अगर सही से काम न करे, तो फेफड़ों तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है, खासकर सीढ़ियां चढ़ते वक्त। सर्दियों में यह लक्षण 25 फीसदी ज्यादा देखा जाता है, क्योंकि ठंड से ब्रोंकाई सिकुड़ जाती हैं। डॉक्टरों का मानना है कि अगर आराम की हालत में भी सांस तेज हो, तो यह कंजेस्टिव हार्ट फेलियर का शुरुआती चरण हो सकता है। तुरंत चेकअप से जटिलताएं टाली जा सकती हैं।
पैरों की सूजन: तरल का जमा खतरा
टखनों या पांवों में सूजन को लंबे समय तक खड़े रहने का नतीजा मानना गलत है। सर्दी में हृदय की पंपिंग कमजोर होने से शरीर में फ्लूइड रिटेन हो जाता है, जो हार्ट फेलियर का बड़ा संकेत है। उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों में यह प्लाक जमा होने से और बढ़ जाता है। अगर सूजन शाम तक न उतरे या दर्द के साथ हो, तो अल्ट्रासाउंड जरूरी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं, नमक कम करें और गर्म पानी से पैर भिगोएं, लेकिन डॉक्टर से सलाह लें।
चक्कर या सिरदर्द: संतुलन का संकट
अचानक चक्कर आना या हल्का सिरदर्द सर्दी के ब्लड प्रेशर ड्रॉप से जुड़ सकता है, लेकिन यह हृदय से रक्त मस्तिष्क तक न पहुंचने का इशारा भी है। ठंड से वासोकोन्स्ट्रिक्शन बढ़ता है, जो डायबिटीज या हाई बीपी वालों के लिए घातक। अगर यह खड़े होते ही हो या उल्टी के साथ, तो इमरजेंसी है। अध्ययनों से पता चलता है कि सर्दियों में स्ट्रोक के 20 फीसदी केस ऐसे लक्षणों से शुरू होते हैं।
जोखिम कारक: क्यों सर्दी दिल को निशाना बनाती है?
हृदय रोग के पीछे उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता मुख्य हैं। सर्दी में ये फैक्टर सक्रिय हो जाते हैं, क्योंकि शरीर गर्म रहने के लिए ज्यादा कैलोरी जलाता है। पारिवारिक इतिहास वाले लोगों का रिस्क दोगुना। नोएडा जैसे प्रदूषित इलाकों में स्मॉग भी हृदय पर असर डालता है। बचाव के लिए रोज 30 मिनट वॉक, फल-सब्जियां और धूम्रपान छोड़ना जरूरी।
विशेषज्ञों की सलाह: सर्दी में हृदय रोगियों को गर्म कपड़े, हाइड्रेशन और दवाओं का पालन करें। अगर लक्षण दिखें, तो नजदीकी अस्पताल पहुंचें। फेलिक्स हॉस्पिटल जैसे संस्थान उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जहां डॉ. राहुल अरोरा जैसे विशेषज्ञ त्वरित परामर्श देते हैं।
अक्सर पूछे सवालों के जवाब
- ठंड में हृदय रोग का खतरा क्यों बढ़ता है? हां, वाहिकाओं के संकुचन से ब्लड प्रेशर ऊंचा होता है।
- छाती दर्द को कैसे पहचानें? अगर लगातार रहे, तो हार्ट अटैक का संकेत।
- थकान सामान्य है? नहीं, अगर बिना कारण हो तो जांच कराएं।
- सूजन का क्या मतलब? हार्ट फेलियर का शुरुआती लक्षण।
- बचाव कैसे? स्वस्थ डाइट, व्यायाम और चेकअप।







