स्पेशल रिपोर्ट, आर्या कुमारी ।
हाल के दिनों में गीजर का इस्तेमाल करते समय बाथरूम में लोगों की मौत के मामले में इजाफा देखने को मिला है, उत्तर भारत में हल्की सर्दी की शुरुआत होते ही गीजर से जुड़े हादसे चिंताजनक रूप से बढ़ने लगे हैं। गीजर का इस्तेमाल करते समय बाथरूम में अचानक दम घुटने व करंट लगने से मौत के कई मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, गीजर से जुड़े खतरे और अधिक गंभीर रूप ले सकते हैं, यदि लोग जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन नहीं करेंगे।
लोग सुबह-शाम तापमान में गिरावट के बाद गर्म पानी के लिए गीजर का इस्तेमाल बढ़ा देते हैं। लेकिन सुरक्षा नियमों की अनदेखी, बंद बाथरूम, गैस का अधूरा दहन, और बिजली के उपकरणों का गलत उपयोग इन सबके कारण हादसों की संख्या अचानक बढ़ जाती है।
अलीगढ़ में गैस गीजर बना मौत की वजह 12 साल की मासूम की दर्दनाक मौत
अलीगढ़ में हुई घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। 12 साल की बच्ची नहाने के लिए बाथरूम में गई, जहाँ गैस गीजर चालू था। बाथरूम पूरी तरह बंद था और वेंटिलेशन नहीं था। गैस के अधूरे दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) नामक जहरीली गैस पूरे कमरे में भर गई। यह गैस बिना रंग-गंध की होती है, इसलिए इसका पता नहीं चलता। बच्ची को अचानक चक्कर आए, वह बेहोश होकर गिर गई और कुछ ही मिनटों में दम घुटने से उसकी मौत हो गई। परिवार ने दरवाजा तोड़ा, लेकिन तब तक सब खत्म हो चुका था।
देवरिया में गीजर का प्लग लगाते समय करंट,महिला की मौके पर मौत
देवरिया में एक महिला गीजर का प्लग लगाने की कोशिश कर रही थी। हाथ थोड़े गीले थे या वायरिंग में खराबी थी,जैसे ही प्लग लगाया, तेज करंट लगा और महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह हादसा दर्शाता है कि इलेक्ट्रिक गीजर भी यदि सावधानी से न चलाए जाएं तो उतने ही खतरनाक साबित हो सकते हैं। खराब बोर्ड, पुराना स्विच, बिना MCB वाले कनेक्शन और गीले हाथ ये सभी मिलकर घातक बिजली दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
सर्दियों में बढ़ता गीजर उपयोग और बढ़ते जोखिम क्यों बन जाते हैं हादसे?
जैसे ही मौसम थोड़ा ठंडा होता है, गीजर का उपयोग कई गुना बढ़ जाता है। सुबह–सुबह लोग जल्दी में बाथरूम में जाते हैं और गीजर को लंबे समय तक ऑन छोड़ देते हैं। बंद बाथरूम में गैस गीजर चलाना, लीकेज को नजरअंदाज करना, गीले हाथों से प्लग छूना और पुरानी वायरिंग; ये सभी कारण हर साल गंभीर दुर्घटनाओं और मौतों को जन्म देते हैं। सुरक्षा विभाग लगातार चेतावनी देता है कि गीजर को लेकर छोटी सी लापरवाही भी बड़ा जोखिम पैदा कर सकती है।
गीजर कैसे काम करता है,साधारण सा उपकरण, लेकिन खतरा बड़ा
गीजर पानी को गर्म करने का उपकरण है, लेकिन इसमें कई तकनीकी हिस्से होते हैं। इलेक्ट्रिक गीजर में हीटिंग एलिमेंट पानी को गर्म करता है, जबकि गैस गीजर में बर्नर पानी के बहाव पर जलता है। थर्मोस्टेट तापमान नियंत्रित करता है, जिससे पानी सही तापमान पर गर्म रहे। हालांकि, खराब थर्मोस्टेट, वोल्टेज की गड़बड़ी, या गैस का अधूरा जलना ये सभी स्थितियाँ दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। इसलिए गीजर को समझ कर और सही तरीके से उपयोग करना जरूरी है।
गीजर के मुख्य प्रकार; कौन-सा कितना सुरक्षित?
- स्टोरेज गीजर
इस गीजर में टैंक में पानी जमा होता है और धीरे-धीरे गर्म होता है। इसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन ओवरहीटिंग और टैंक खराब होने की समस्या हो सकती है अगर सर्विसिंग ठीक न हो।
- इंस्टेंट गीजर
इसमें पानी रोककर नहीं रखा जाता। स्विच ऑन करते ही पानी तुरंत गर्म होता है। यह तेज और सुविधाजनक है, लेकिन बिजली की खपत अधिक होती है।
- गैस गीजर
LPG/PNG से चलने वाला यह गीजर कम खर्चीला और तेज है, लेकिन इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड बनने का सबसे बड़ा खतरा होता है। इसलिए इसे हमेशा वेंटिलेशन वाले स्थान पर ही लगाना चाहिए।
गीजर से मौत कैसे होती है? समझें सबसे खतरनाक दो कारण
सर्दियों में गीजर से जान जाने के दो प्रमुख कारण सामने आते हैं कार्बन मोनोऑक्साइड से दम घुटना और बिजली का करंट लगना। विशेषज्ञों का कहना है कि ये दोनों हादसे इतने “साइलेंट” होते हैं कि ज्यादातर मामलों में पीड़ित को खतरे का अहसास तक नहीं होता।
1. गैस गीजर से कार्बन मोनोऑक्साइड का ज़हर
बंद बाथरूम में गैस गीजर चलाने पर अधूरा दहन होता है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस तेजी से फैलती है। यह गैस खून में ऑक्सीजन की जगह ले लेती है और कुछ ही मिनटों में व्यक्ति बेहोश हो जाता है। सांस रुकने के कारण शरीर का सिस्टम बंद होने लगता है और अक्सर मौके पर ही मौत हो जाती है।
अलीगढ़ और कई अन्य शहरों में हुई घटनाओं में यही कारण घातक बना।
2. इलेक्ट्रिक गीजर से घातक करंट
इलेक्ट्रिक गीजर में खराब वायरिंग, पानी की नमी, ओपन सॉकेट या लीकेज करंट की स्थिति में व्यक्ति को तेज झटका लग सकता है। कई मामलों में झटके की तीव्रता इतनी ज्यादा होती है कि पीड़ित तुरंत गिर पड़ता है और उसकी मौत हो जाती है।
बिजली विशेषज्ञ इसे “इंस्टेंट फेटल शॉक” की श्रेणी में रखते हैं।
गीजर का गलत उपयोग शरीर को कैसे नुकसान पहुँचाता है? मौत के अलावा ये खतरे भी गंभीर
गीजर से जुड़े जोखिम सिर्फ जानलेवा हादसों तक सीमित नहीं हैं। लगातार गलत उपयोग शरीर पर कई गंभीर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव छोड़ सकता है। डॉक्टरों की मानें तो समय रहते सावधानी न बरती जाए तो ये समस्याएँ हमेशा के लिए रुक सकती हैं।
- सांस की बीमारियाँ और फेफड़ों पर असर
थोड़ी मात्रा में भी CO गैस शरीर में चली जाए तो अस्थमा, सांस फूलना, घबराहट और फेफड़ों की क्षमता कम होना जैसी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक यह गैस फेफड़ों को स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकती है।
- सिरदर्द, चक्कर और थकान
CO गैस का सबसे तेज असर दिमाग पर होता है। इससे सिर भारी होना, चक्कर आना, उलझन, मानसिक कमजोरी और ध्यान केंद्रित न कर पाने जैसी दिक्कतें दिखाई देती हैं। कई मामलों में यह असर घंटों तक बना रहता है।
- त्वचा का जलना और स्किन डैमेज
अगर गीजर का तापमान बहुत अधिक सेट हो जाए तो पानी खतरनाक रूप से उबल जाता है। इससे त्वचा जलना, फफोले पड़ना या स्किन का नुकसान आम है विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में।
- दिल और दिमाग पर गंभीर प्रभाव
खून में ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) होने पर दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने पर ब्रेन स्ट्रोक जैसी स्थिति भी बन सकती है।
- इलेक्ट्रिक शॉक की स्थायी चोटें
यदि करंट जानलेवा न भी हो, तब भी यह शरीर के अंदरूनी हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। मांसपेशियों का जाम होना, नसों की चोट, हाथ-पैर सुन्न पड़ जाना और लंबे समय तक चलने वाली मेडिकल समस्याएँ इसके उदाहरण हैं।
गीजर वाले बाथरूम में लोगों की घातक गलतियाँ
- खिड़की या एग्जॉस्ट बंद रखना
- बाथरूम को पूरी तरह एयरटाइट बना देना
- गीजर को लंबे समय तक ऑन छोड़ देना
- गीले हाथों से स्विच या प्लग छूना
- पाइप या फिटिंग की लीकेज को नजरअंदाज करना
- बुजुर्गों या बच्चों को अकेले गीजर इस्तेमाल करने देना
- नकली या पुराने पाइप और वायरिंग का उपयोग
- बिना अर्थिंग और MCB वाले बोर्ड का उपयोग
ये छोटी–छोटी गलतियाँ कई बड़ी मौतों की वजह बनती हैं।
घर में गीजर इंस्टॉल करते समय जरूरी सावधानियाँ
- फैमिली की जरूरत के अनुसार सही क्षमता वाला गीजर चुनें
- हमेशा ISI मार्क और BEE रेटिंग वाला प्रोडक्ट खरीदें
- गैस गीजर सिर्फ वेंटिलेशन वाली जगह ही लगाएं
- इंस्टॉलेशन प्रोफेशनल से करवाएं
- गीजर को ऊंचाई पर लगाएं,
- पानी से दूर रखें
- MCB, अर्थिंग और सुरक्षित वायरिंग का उपयोग करें
- मेटल पाइप और गुणवत्ता वाली फिटिंग का उपयोग करें
कौन-सा गीजर सबसे सुरक्षित है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रिक स्टोरेज गीजर सबसे सुरक्षित विकल्प है। इसमें गैस लीकेज, CO बनना या खराब दहन जैसी समस्याएँ नहीं होतीं। यह तापमान को नियंत्रित रखता है और बिजली के सुरक्षित कनेक्शन के साथ काम करता है। गैस गीजर तेजी से पानी गर्म करता है और खर्च भी कम है, लेकिन यदि वेंटिलेशन न हो तो यह जानलेवा हो सकता है। इसलिए जिन घरों में बाथरूम छोटा या बंद हो, वहाँ इलेक्ट्रिक गीजर ही उपयोग करना चाहिए।
गीजर की सर्विसिंग कब करानी चाहिए?
गीजर की नियमित सर्विसिंग बेहद जरूरी है। यदि पानी धीरे-धीरे गर्म होने लगे, टैंक से आवाज आए, पानी का फ्लो कम हो जाए, पानी में बदबू आए या बिजली का बिल अचानक बढ़ जाए तो समझ लें कि गीजर को सर्विसिंग की जरूरत है। हर 6–12 महीने में एक बार प्रोफेशनल सर्विसिंग कराना जरूरी है, जिससे लीकेज, जंग, हीटिंग एलिमेंट की खराबी और ओवरहीटिंग जैसे जोखिम खत्म हो जाते हैं। समय पर की गई सर्विसिंग गीजर की उम्र बढ़ाती है और सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है।
गीजर का तापमान कितना रखना चाहिए?
40°C से 55°C का तापमान सबसे सुरक्षित माना जाता है। इससे नहाने का पानी न ज्यादा गर्म होता है न स्किन को नुकसान पहुंचाता है। कई लोग इससे ऊपर तापमान सेट कर देते हैं, जिससे पानी बहुत गर्म हो जाता है और जलने का खतरा होता है। तापमान का संतुलन बिजली बचाता है, गीजर की लाइफ बढ़ाता है और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए पानी हमेशा मध्यम तापमान पर ही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि उनकी स्किन ज्यादा संवेदनशील होती है।







