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सीवान के भगवानपुर हाट में जलजमाव ने किसानों की कमर तोड़ दी

लोकल डेस्क, मुस्कान कुमारी | 

धान कटनी मुश्किल, गेहूं की बुआई अधर में लटकी, 30 फीसदी खेत अभी भी पानी में डूबे

भगवानपुर हाट (सीवान): भगवानपुर हाट प्रखंड के चंवर क्षेत्र में जलजमाव ने किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है। एक तरफ धान की कटाई कर रहे किसान घुटने-कमर तक पानी में खड़े होकर फसल काटने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ गेहूं की बुआई का आधा से ज्यादा मौसम निकल चुका है, लेकिन करीब 30 प्रतिशत खेतों में अभी भी पानी खड़ा है। नतीजा – इस साल रबी फसल की पैदावार पर भारी संकट मंडरा रहा है।

चंवर की नीची जमीन बनी ताल

प्रखंड के चंवर, महमदपुर, कोरार, बेलाैर, हरपुर समेत दर्जनों गांवों की निचली जमीन इन दिनों छोटे-छोटे तालाब में बदल चुकी है। किसान बताते हैं कि कई खेतों में पानी इतना है कि बैल भी नहीं घुस पा रहे। मजबूरन मजदूरों को पानी में उतरकर धान काटना पड़ रहा है। एक किसान रामायण यादव ने बताया, “फसल काटने में जितना खर्च आ रहा, उससे ज्यादा तो मजदूरी और कीचड़ में फंसे बैलों को निकालने में लग गया।”

गेहूं की बुआई का समय निकला, खेत तैयार नहीं

सामान्य तौर पर चंवर क्षेत्र में नवंबर के पहले पखवाड़े तक गेहूं की बुआई पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं। ऊपरी खेतों में जहां पानी उतर गया है, वहां भी इतनी नमी है कि ट्रैक्टर चलाना नामुमकिन है। किसान रामेश्वर राय कहते हैं, “जुताई करो तो हल फंस जाता है, छोड़ो तो समय निकल रहा है। इस बार गेहूं की बुआई आधी से भी कम हो पाएगी।”

पानी में खड़ी धान भी हो रही बर्बाद

जिन खेतों में अभी धान कटनी बाकी है, वहां फसल पककर गिरने लगी है। पानी में खड़ी फसल का दाना सड़ने की कगार पर है। किसान श्याम सुंदर सिंह ने बताया, “दो बीघे धान अभी भी खेत में खड़ा है। मजदूर पानी देखकर आने को तैयार नहीं। जो आते हैं, उनसे दोगुनी मजदूरी मांगते हैं। कुल मिलाकर लागत दोगुनी, पैदावार आधी।”

ऊपरी खेतों में पटवन शुरू, नीचे हालात बदतर

जिन किसानों की जमीन ऊंची है, उन्होंने किसी तरह जुताई कर गेहूं बो दिया है। वहां फसल अब पटवन लायक हो गई है, लेकिन नीची जमीन वाले किसान हाथ मलते रह गए। प्रखंड कृषि पदाधिकारी के मुताबिक इस बार चंवर पंचायत में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। अनुमान है कि इस क्षेत्र में करीब 1200 हेक्टेयर रबी फसल प्रभावित हुई है।

किसान परेशान: करें तो क्या करें?

ज्यादातर किसान अभी भी आसमान ताक रहे हैं कि कब धूप निकले और खेत सूखें। एक बुजुर्ग किसान बैजू प्रसाद ने कहा, “साल भर मेहनत करते हैं, पर दो महीने की बारिश सब कुछ चौपट कर देती है। न नाली बनी, न जल निकासी की कोई व्यवस्था। हर साल यही कहानी।”

जलजमाव की वजह साफ, समाधान अब तक गायब

स्थानीय लोगों का कहना है कि चंवर क्षेत्र की सारी नालियां या तो बंद हैं या उन पर अतिक्रमण हो चुका है। बारिश का पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा। कई जगहों पर सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी डालकर पुरानी नालियां दबा दी गईं। नतीजा आज सबके सामने है।

इस साल रबी फसल पर छाया संकट का बादल

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले दस दिन में भी खेत नहीं सूखे तो इस बार गेहूं की पैदावार पिछले साल के मुकाबले 40-50 फीसदी तक कम हो सकती है। कई किसानों ने तो तय कर लिया है कि इस बार नीची जमीन में गेहूं बोना ही छोड़ देंगे।