नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व दौरे से पहले भाजपा ने कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने पुराने पत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि नेहरू सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उससे जुड़े आयोजनों के विरोधी थे।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास में सोमनाथ मंदिर को मोहम्मद गजनी और खिलजी ने लूटा, लेकिन स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक विरोध पंडित नेहरू की ओर से देखने को मिला। उन्होंने कुछ पत्र सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखे पत्र में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से जुड़ी बातों को गलत बताया था।
भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, नेहरू ने भारतीय दूतावासों को निर्देश दिए थे कि वे सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट को किसी भी प्रकार की सहायता न दें। इसमें अभिषेक समारोह के लिए नदियों से जल उपलब्ध कराने से जुड़ी मांगों को भी खारिज किया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेहरू ने राष्ट्रपति के सोमनाथ मंदिर दौरे के प्रभाव को कम करने की कोशिश की थी।
डॉ. त्रिवेदी ने दावा किया कि पंडित नेहरू ने तत्कालीन गृह मंत्री सी. राजगोपालाचारी को पत्र लिखकर सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में राष्ट्रपति की भागीदारी का विरोध किया था। इसके साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्री को लिखे पत्र में अभिषेक समारोह की मीडिया कवरेज को सीमित करने की बात कही गई थी।
भाजपा का कहना है कि इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि नेहरू सोमनाथ मंदिर से जुड़े आयोजनों को लेकर आशंकित थे और अंतरराष्ट्रीय छवि का हवाला देकर उन्होंने कई बार आपत्ति जताई। पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि आज भी उसकी सोच उसी मानसिकता को दर्शाती है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है, जबकि कांग्रेस और उसके नेताओं का रुख इसके विपरीत रहा है।







