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अच्छे आचरण और कर्म ही मनुष्य की सच्ची सुंदरता : बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, आकाश अस्थाना ।

रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष, मीडिया प्रभारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने कहा कि मनुष्य की वास्तविक सुंदरता उसके अच्छे आचरण और कर्मों से ही प्रकट होती है। उन्होंने अपने विचार प्रेस से साझा करते हुए कहा कि उपासना, साधना और आराधना—इन तीन माध्यमों से ही ईश्वर मनुष्य के जीवन में प्रवेश करता है और उसे उच्च विचार तथा श्रेष्ठ चरित्र निर्माण की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति साहस और दृढ़ संकल्प के साथ इस मार्ग पर चलता है, वह असीम शक्ति प्राप्त करता है और स्वयं को ऊँचा उठाता है। ऐसे लोगों पर ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है। वर्तमान समय में जब संसार काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसी बुराइयों से प्रभावित है, तब मनुष्य के लिए ईश्वर की शरण ही सबसे बड़ा सहारा है।

लायंस क्लब ऑफ रक्सौल से जुड़े सर्राफ ने जीवन के संदर्भ में उदाहरण देते हुए कहा कि इंसान को इतनी गलतियाँ नहीं करनी चाहिए कि पेंसिल से पहले रबर घिस जाए, और न ही रबर को इतना घिसना चाहिए कि जीवन का पृष्ठ ही फट जाए। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति में शारीरिक सुंदरता की कमी हो, तो उसे अच्छे आचरण से पूरा किया जा सकता है, लेकिन अच्छे आचरण की कमी को बाहरी सुंदरता से पूरा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि जब हम किसी का अपमान करते हैं, तो वास्तव में हम अपना ही सम्मान खोते हैं। जीवन की तुलना एक मुकदमे से करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं और व्यक्ति को वास्तविकता में जीना सीखना चाहिए, क्योंकि इच्छाओं का निर्णय अक्सर भविष्य पर टलता रहता है।

सर्राफ ने सकारात्मक सोच पर जोर देते हुए कहा कि जब दूसरों की नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ हमारे मन को प्रभावित करना बंद कर दें, तब समझ लेना चाहिए कि हमारा आत्मविश्वास नई ऊँचाइयों को छूने वाला है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सही-गलत के विवाद में उलझने के बजाय अपनी उन्नति पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि व्यक्तिगत प्रगति से ही समाज की उन्नति संभव है।

अंत में उन्होंने कहा कि संस्कार और संक्रमण दोनों ही एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं। जहाँ संस्कार मानव सभ्यता को सुदृढ़ करते हैं, वहीं नकारात्मकता विनाश की ओर ले जाती है। इसलिए जीवन में इंतजार करने के बजाय निरंतर प्रयास करना चाहिए, क्योंकि प्रयास करने वालों को ही वास्तविक सफलता प्राप्त होती है।