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अमेरिका को झेलना पड़ेगा बड़ा नुकसान: ईरान

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

तेहरान, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि बिना किसी नए उकसावे के ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू की जाती है, तो अमेरिका को पहले से कहीं अधिक गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्षों से ईरान ने महत्वपूर्ण अनुभव और रणनीतिक सबक हासिल किए हैं, जिनका इस्तेमाल भविष्य में किसी भी शत्रुतापूर्ण कदम के जवाब में किया जाएगा। अराघची ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ईरान अब किसी भी संभावित हमले का अधिक प्रभावी तरीके से जवाब देने में सक्षम है।

अराघची ने अमेरिकी कांग्रेस से जुड़ी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि ईरान के साथ हुए 40 दिनों के सैन्य संघर्ष में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनके अनुसार, रिपोर्ट में माना गया है कि इस अवधि के दौरान अमेरिका के कम से कम 42 सैन्य विमान या तो नष्ट हुए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। उन्होंने कहा कि इससे अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और यह ईरान की सैन्य क्षमता को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरानी बल दुनिया में पहली बार एफ-35 लड़ाकू विमान को मार गिराने वाले सैन्य बल बने।

रिपोर्ट के मुताबिक, कथित नुकसान में कई प्रकार के सैन्य विमान और उपकरण शामिल हैं। इनमें एफ-15ई स्ट्राइक ईगल, एफ-35ए लाइटनिंग-2, ए-10 थंडरबोल्ट-2 जैसे लड़ाकू विमान, हवा में ईंधन भरने वाले केसी-135 विमान, ई-3 सेंट्री निगरानी विमान, एमसी-130जे कमांडो विमान, हेलीकॉप्टर तथा बड़ी संख्या में ड्रोन शामिल बताए गए हैं। अनुमान लगाया गया है कि तत्काल नुकसान लगभग 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि दीर्घकालिक प्रतिस्थापन लागत 7 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए संयुक्त हवाई अभियान के बाद क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ा था। यह सैन्य टकराव सात अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के बाद कुछ हद तक थमा। संघर्ष के दौरान ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य परिसंपत्तियों को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ नष्ट हुए सैन्य सिस्टम अब उत्पादन में नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें दोबारा तैयार करने के लिए उत्पादन लाइनों को फिर शुरू करना पड़ सकता है। विशेष रूप से ई-3 सेंट्री विमान के नुकसान की स्थिति में अमेरिका को पहले बंद किए गए ई-7 वेजटेल कार्यक्रम को दोबारा सक्रिय करना पड़ सकता है, जिसकी लागत अरबों डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन अभी स्पष्ट नहीं है और अंतिम आंकड़े बाद में बदल सकते हैं।

इस बीच संघर्ष के प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों तक भी पहुंचे हैं। अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरानी बंदरगाहों और क्षेत्रीय गतिविधियों पर असर पड़ा, जिससे तेल आपूर्ति और ईंधन कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी। अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण राजनीतिक दबाव भी तेज हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि यह तनाव जल्द समाप्त हो सकता है और किसी समझौते के बाद तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी।

उधर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्पष्ट किया है कि उनका देश बाहरी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर कठोर रुख बनाए रखेगा तथा किसी भी प्रकार के दबाव का सामना करने के लिए तैयार है।