विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास जताते हुए कहा है कि तेहरान तभी किसी प्रकार की वार्ता के लिए आगे बढ़ेगा, जब वाशिंगटन बातचीत को लेकर वास्तविक गंभीरता और स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान का रुख स्पष्ट है और केवल औपचारिक बातचीत या राजनीतिक दबाव के तहत कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिका की नीतियों और पूर्व के अनुभवों के कारण उस पर भरोसा नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी संभावित संवाद की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका अपने व्यवहार और नीतिगत दृष्टिकोण में कितनी ईमानदारी दिखाता है। उन्होंने संकेत दिया कि विश्वास बहाली के बिना सार्थक बातचीत संभव नहीं होगी।
विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है और सामान्य परिस्थितियों में अधिकांश जहाजों के आवागमन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ संघर्ष या युद्ध से जुड़े जहाजों को अलग दृष्टिकोण से देखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो जहाज इस सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरना चाहते हैं, उनके लिए ईरानी नौसेना के साथ समन्वय आवश्यक होगा। उनके अनुसार, क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए समन्वय बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार के तनाव या टकराव की स्थिति से बचा जा सके।
अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति फिलहाल बेहद जटिल बनी हुई है। इस क्षेत्र में मौजूद विभिन्न सुरक्षा पहलुओं और राजनीतिक तनावों के कारण हालात संवेदनशील हैं, जिन पर ईरान लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्रीय घटनाक्रम का असर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने दोहराया कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देता रहेगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय बातचीत या क्षेत्रीय व्यवस्था में पारस्परिक सम्मान और गंभीरता आवश्यक है, अन्यथा सकारात्मक परिणामों की उम्मीद करना कठिन होगा।







